बुनियादी सुविधाओं की कमी से नाराज लोगों ने कॉलोनियों के बदले नाम, प्रशासन ने हटाए पोस्टर | agra news
उत्तर प्रदेश के आगरा में विकास कार्यों की अनदेखी से नाराज स्थानीय लोगों ने प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए अनूठा तरीका अपनाया। देवरेथा क्षेत्र सहित करीब आधा दर्जन कॉलोनियों के निवासियों ने अपनी बस्तियों के नाम बदलकर ‘नरक पुरी’, ‘घिनौना नगर’ और ‘कीचड़ नगर’ जैसे प्रतीकात्मक बोर्ड लगा दिए। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण पिछले 14 वर्षों से अधूरी पड़ी सड़कें और सीवर की गंभीर समस्या है, जिससे लगभग 20 हजार की आबादी प्रभावित हो रही है।
मामले की जानकारी मिलते ही आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) के अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और इन पोस्टरों को हटवा दिया। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की हरकत दोबारा की गई, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान स्थानीय लोगों और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। निवासियों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद क्षेत्र की सुधि नहीं लेते।
विरोध जता रहे नागरिकों का कहना है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में आगरा को भले ही बेहतर रैंकिंग मिली हो, लेकिन जमीनी हकीकत दावों के बिल्कुल विपरीत है। मुख्य सड़कों पर घुटने तक कीचड़ और जलभराव आम बात है। वहीं, एडीए अधिकारियों का पक्ष है कि विकास कार्य कराने के लिए निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से स्थानीय लोगों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति आक्रोश और अधिक बढ़ गया है, जो बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
