आगरा के परिषदीय विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प की खुली पोल, फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर नौनिहाल | agra news
उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षा तंत्र को आधुनिक बनाने के बड़े-बड़े दावों की हकीकत आगरा जिले में साफ तौर पर देखी जा सकती है। सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए शुरू किए गए ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत जिले के कुल 2219 विद्यालयों में से 1120 स्कूल ऐसे हैं जहां स्मार्ट क्लास, शुद्ध पेयजल, शौचालय और टाइल्स जैसी 19 बुनियादी सुविधाएं अभी तक पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई हैं।
फतेहाबाद, अकोला, फतेहपुर सीकरी और अछनेरा ब्लॉक के कई प्राथमिक विद्यालयों में धरातल पर हालात बेहद चिंताजनक मिले। कई स्कूलों में भवन जर्जर होने के कारण उन्हें ध्वस्त कर दिया गया है, लेकिन नए भवनों का निर्माण कार्य समय पर शुरू न होने से बच्चों को टीनशेड के नीचे या किराए के कमरों में पढ़ाया जा रहा है। जिन स्कूलों के भवन सुरक्षित हैं, वहां भी फर्नीचर की भारी किल्लत बनी हुई है। फतेहाबाद और अछनेरा के कई विद्यालयों में छात्र-छात्राएं फर्श पर टाट-पट्टी बिछाकर पढ़ाई करने को विवश हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का लगातार जमीन पर बैठकर पढ़ाई करना उनकी शारीरिक सेहत के लिए हानिकारक है। लंबे समय तक गर्दन झुकाकर पढ़ने से रीढ़ की हड्डी और गर्दन की नाजुक मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। ग्रामीण इलाकों के अभिभावकों का कहना है कि जब तक विद्यालयों में बैठने और पढ़ाई की बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं होंगी, तब तक सरकारी योजनाओं का लाभ बच्चों तक नहीं पहुंच पाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में सफाई दी गई है कि जिले में फर्नीचर सेट की कमी को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही सभी स्कूलों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर दी जाएंगी ताकि बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
