दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का नया पता, जंतर-मंतर पर रोक | national news
भारतीय लोकतंत्र में अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए विरोध-प्रदर्शनों का एक लंबा इतिहास रहा है। इसी कड़ी में राजधानी दिल्ली की प्रसिद्ध प्रोटेस्ट साइट जंतर-मंतर को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के फैसले के बाद अब जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की सूची से हटा दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था, बढ़ते शहरीकरण और वीवीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे तीन दशकों पुराना एक दौर थम गया है।
आजादी के बाद से अस्सी के दशक तक इंडिया गेट के पास स्थित ‘बोट क्लब’ आंदोलनों का मुख्य गढ़ हुआ करता था। लेकिन 1988 में किसानों के ऐतिहासिक प्रदर्शन और राजधानी की रफ्तार थमने के बाद सुरक्षा कारणों से वहां पाबंदी लगा दी गई थी। इसके बाद 1993 में टॉल्स्टॉय मार्ग स्थित जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध स्थल बनाया गया। पिछले तीन दशकों में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से लेकर पहलवानों के धरने तक, जंतर-मंतर अनगिनत बड़े आंदोलनों और जन-आंदोलनों का गवाह रहा है।
गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर अब दिल्ली में धरने के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए गए हैं। इनमें ऐतिहासिक रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी ग्राउंड शामिल किए गए हैं। इस बदलाव से शहर में यातायात और आम जनता को होने वाली असुविधा से राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि नागरिक अधिकारों के जानकारों का मानना है कि सत्ता के केंद्रों से दूर इन नए स्थानों पर प्रदर्शनों का प्रभाव बदल सकता है।
