दिल्ली के रामलीला मैदान में विरोध प्रदर्शन करना हुआ मुश्किल, ढाई महीने की बुकिंग फुल और भारी फीस बना चुनौती | delhi news
दिल्ली में प्रशासनिक बदलावों के तहत जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शनों की सूची से हटाए जाने के बाद, अब रामलीला मैदान को मुख्य प्रदर्शन स्थल बनाया गया है। लेकिन यहां आंदोलन करना आसान नहीं रह गया है। स्थिति यह है कि आगामी ढाई महीनों के लिए इस ऐतिहासिक मैदान में बुकिंग पूरी तरह फुल चल रही है, जिससे राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के सामने प्रदर्शन की जगह तलाशने का संकट खड़ा हो गया है।
भारी-भरकम फीस और नियम बने चुनौती
अधिकारियों के मुताबिक, 12 एकड़ में फैले इस मैदान की बुकिंग दर 50,000 रुपये प्रतिदिन है, जिसके साथ 55,000 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा करनी होती है। टैक्स और अन्य शुल्कों को मिलाकर एक दिन का शुरुआती खर्च लगभग 1.21 लाख रुपये बैठता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर इस तरह का कोई शुल्क नहीं वसूला जाता था, लेकिन नए नियमों के तहत इतनी भारी फीस चुकाना छोटे संगठनों और स्थानीय समूहों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ है। हालांकि, मैदान का एक छोटा हिस्सा मुफ्त प्रदर्शन के लिए रखा गया है, जिसकी क्षमता मात्र 150 लोगों की है।
त्योहारी सीजन और प्रशासनिक प्रक्रिया
नगर निगम के बागवानी विभाग के माध्यम से मिलने वाली इस बुकिंग के लिए दिल्ली पुलिस से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के कारण यह मैदान पहले से ही विभिन्न उत्सवों और कार्यक्रमों के लिए आरक्षित है। व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित होने और आसपास कई बड़े अस्पताल तथा निगम मुख्यालय होने के कारण आयोजनों से यातायात पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है, जिसके चलते प्रशासन अब हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रहा है।
