राष्ट्रपति ने वोट चोरी के आरोपों का खंडन नहीं किया, विपक्ष जल्द सौपेगा सबूत | india politics
देश की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब विपक्ष के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समेत INDIA गठबंधन के 10 प्रमुख नेता शामिल रहे। नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों व वोट चोरी के मामलों में हस्तक्षेप करने की मांग की।
मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि राष्ट्रपति के समक्ष जब चुनावी धांधली का मुद्दा उठाया गया, तो उन्होंने इसका खंडन नहीं किया, बल्कि विपक्ष से इसके पुख्ता सबूत मांगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है और विपक्ष इन सभी आरोपों के समर्थन में जल्द ही राष्ट्रपति को दस्तावेज सौंपेगा। इस मुलाकात से पहले विपक्षी सांसदों ने संसद से विजय चौक तक मार्च निकालने की कोशिश भी की थी, जिसे प्रशासन ने रोक दिया था।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इस मुलाकात को अहम बताते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। विपक्ष ने मांग की है कि भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराए जाएं। राजनीतिक भविष्य की रणनीति के तहत अब विपक्षी दल आगामी सोमवार को देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से भी मुलाकात करेंगे, जिससे यह राजनीतिक टकराव और अधिक गहराने के आसार बन गए हैं। इस तरह के घटनाक्रम सीधे तौर पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं, जिसका असर आगामी राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ना तय है।
