आगरा किला में जहांआरा और रोशनआरा की छतरियां चमकीं, मडपैक और केमिकल ट्रीटमेंट से संतरा और संगमरमर हुआ साफ | agra news
आगरा किला स्थित ऐतिहासिक जहांआरा और रोशनआरा की छतरियां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रसायन शाखा द्वारा किए गए विशेष संरक्षण कार्यों के बाद एक बार फिर अपनी पुरानी चमक के साथ दमक उठी हैं। लंबे समय से पर्यटकों के स्पर्श और वातावरणीय प्रदूषण के कारण इन स्मारकों का संगमरमर पीला पड़ गया था और तांबे की प्लेटें काली हो चुकी थीं।
एएसआई की टीम ने जुलाई के अंतिम सप्ताह में इन छतरियों के संरक्षण का कार्य शुरू किया था जो करीब दो महीने तक चला। इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग 12 लाख रुपये की लागत आई है। संगमरमर की सतह पर मुल्तानी मिट्टी का लेप यानी मडपैक ट्रीटमेंट किया गया, जिसने धूल और गंदगी के कणों को पूरी तरह से सोख लिया। इसके बाद पानी से धुलाई कर संगमरमर को उसकी मूल श्वेत रंगत में लाया गया।
इतिहास के पन्नों के अनुसार, ये छतरियां मुगल सम्राट शाहजहां और मुमताज की बेटियों जहांआरा और रोशनआरा से जुड़ी हुई हैं, जो आगरा किला के खास महल परिसर के उत्तर और दक्षिण में स्थित हैं। इस तरह के संरक्षण कार्यों से न केवल प्राचीन धरोहरों की आयु बढ़ती है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी मुगल कालीन वास्तुकला का वास्तविक स्वरूप देखने को मिलता है।
