बच्चों में तेजी से बढ़ रहा दिमागी बुखार का खतरा, बरतें ये सावधानियां | agra news
छोटे बच्चों में वायरल और ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) की वजह से होने वाले दिमागी बुखार यानी मेनिनजाइटिस के मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी और निजी अस्पतालों में गंभीर हालत में पहुंच रहे बच्चों के मामलों से यह साफ है कि इस बीमारी को लेकर जरा भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
चिकित्सकीय आंकड़ों के अनुसार, आपातकालीन वार्डों में दौरे और बेहोशी की समस्या के साथ आने वाले छोटे बच्चों में एक बड़ा हिस्सा मेनिनजाइटिस से पीड़ित मिल रहा है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी कमजोर होने के कारण वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण तेजी से उनके मस्तिष्क की झिल्लियों को प्रभावित करते हैं। सिर में गंभीर चोट लगना भी इसका एक कारण बन सकता है, जिससे मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है और तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टियां व दौरे जैसी समस्याएं उभरती हैं।
इस बीमारी के बढ़ने से न केवल बच्चों की जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि समय पर इलाज न मिलने पर उनके शरीर के किसी हिस्से में लकवा मारने की आशंका भी कई गुना बढ़ जाती है। खासकर टीबी से जुड़े संक्रमण के मामलों में यह खतरा और अधिक गंभीर हो जाता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि बच्चों को इस गंभीर संक्रमण से बचाने के लिए उनके खानपान पर विशेष ध्यान दें और उन्हें पौष्टिक आहार दें ताकि उनकी इम्युनिटी मजबूत बनी रहे। इसके अलावा, समय पर बीसीजी, मेनिंगोकोकल और न्यूमोकोकल जैसी जरूरी वैक्सीन लगवाना बेहद आवश्यक है। यदि बच्चे को तेज बुखार के साथ दौरे आएं या बेहोशी छाए, तो बिना एक पल गंवाए उसे किसी अच्छे चिकित्सक के पास ले जाएं।
