सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के जज को लगाई फटकार, जमानत कानून पर दी थी बिन मांगी सलाह | national news
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक मर्यादा का उल्लंघन करते हुए शीर्ष अदालत को सलाह देने वाले एक निचली अदालत के जज के रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। मामला पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का है, जहां बारासात के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एक आपराधिक मामले की सुनवाई कर रहे थे। सर्वोच्च अदालत ने इस मामले को तय समय सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया था, लेकिन समयाअवधि बीत जाने के बाद जज ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर अतिरिक्त समय की मांग की थी।
मांगे गए समय के पत्र के अंत में जज ने जमानत कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट को ही नसीहत दे डाली। पत्र में लिखा गया था कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उच्च अदालतों को किन मामलों में जमानत देनी चाहिए और किन मामलों में नहीं। इस गैर-जरूरी सलाह पर जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी पीठासीन अधिकारी का यह कार्यक्षेत्र नहीं है कि वह सुप्रीम कोर्ट को कानूनी मामलों में दिशा-निर्देश दे या अपनी राय थोपे।
इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित जज से फौरन जवाब तलब करे और यह स्पष्ट करे कि आखिर किस परिस्थिति में इस प्रकार की टिप्पणी की गई थी। न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों से निचली अदालतों और शीर्ष अदालत के बीच समन्वय और अनुशासन की रूपरेखा और अधिक स्पष्ट होती है। जज के जवाब के आधार पर आगामी दिनों में इस पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
