आरोपी के बरी होने पर भी पीड़ित को मिलेगा मुआवजा, दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला | delhi high court news
दिल्ली हाईकोर्ट ने न्याय के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए एक अहम फैसले में यह साफ कर दिया है कि यदि किसी आपराधिक मामले में आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो जाता है, तो इसका असर पीड़ित को मिलने वाले मुआवजे पर नहीं पड़ेगा। अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी को संदेह का लाभ मिल सकता है, लेकिन इससे पीड़ित का दर्द और उसका स्थायी नुकसान समाप्त नहीं होता।
यह मामला साल 2006 में गुरुग्राम में हुई एक भीषण सड़क दुर्घटना से जुड़ा है। उस वक्त 21 वर्षीय बीकॉम का छात्र एक बेकाबू ट्रक की चपेट में आ गया था। इस हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और अब तक उसकी 27 से ज्यादा सर्जरी हो चुकी हैं, बावजूद इसके उसकी जिंदगी सामान्य नहीं हो सकी है। दुर्घटना के बाद मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 37 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था, जिसे ट्रक चालक ने चुनौती दी थी। चालक का तर्क था कि चूंकि उसे निचली अदालत ने बरी कर दिया है, इसलिए मुआवजा रद्द किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने चालक की दलील को खारिज करते हुए मुआवजे की राशि को 37 लाख से बढ़ाकर 53 लाख रुपये कर दिया। अदालत ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि क्रिमिनल कोर्ट में किसी को दोषी ठहराने के लिए ‘संदेह से परे’ कड़े सबूतों की आवश्यकता होती है, जबकि मुआवजा मामलों में ‘संभावनाओं की प्रबलता’ के आधार पर न्याय किया जाता है। अदालत के इस फैसले से देश भर के सड़क दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
