मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के संवैधानिक प्रावधान और पूरी प्रक्रिया | national politics news
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच विपक्षी दल उन्हें पद से हटाने के लिए तीसरी बार संसद में नोटिस लाने की तैयारी कर रहे हैं। इस कदम से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर बहस छिड़ गई है। जनता के बीच भी इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है, जिससे संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर जनता की निगाहें टिक गई हैं। (national politics news)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी ही कठिन प्रक्रिया के जरिए ही पद से हटाया जा सकता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत संसद के दोनों सदनों में से किसी एक में प्रस्ताव का नोटिस देकर होती है। लोकसभा में इसके लिए कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति तय करते हैं कि प्रस्ताव स्वीकार किया जाए या नहीं।
यदि नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है, तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया जाता है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज, किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ शामिल होते हैं। समिति द्वारा जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद संसद के दोनों सदनों में इस पर लंबी चर्चा और मतदान होता है। प्रस्ताव को पारित होने के लिए दोनों सदनों में कुल सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत मिलना जरूरी है। इसके बाद ही अंतिम मुहर के लिए मामला राष्ट्रपति के पास जाता है। अब देखना यह है कि विपक्ष का यह नया कदम संसद के आगामी सत्र में क्या नया मोड़ लाता है।
