हमास को फंडिंग मामले में घिरे इजरायली पीएम नेतन्याहू, विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल | world news
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन कड़े राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि 7 अक्टूबर 2023 के बड़े हमलों से पहले इजरायली खुफिया एजेंसियों ने प्रधानमंत्री को कतर से हमास के सैन्य विंग तक पहुंच रही फंडिंग को लेकर आगाह किया था। खुफिया आकलन के अनुसार, यह वित्तीय सहायता हमास के सैन्य बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा थी, जिसे रोकने के लिए समय रहते कदम उठाए जाने की आवश्यकता थी [world news]।
इस खुलासे के सामने आते ही इजरायली राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों और प्रमुख नेताओं ने नेतन्याहू की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि यदि सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते चेतावनी दी थी, तो उसे नजरअंदाज क्यों किया गया। इस तरह के गंभीर आरोप ऐसे समय में लगे हैं जब देश पहले ही सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया विफलताओं को लेकर भारी अंदरूनी कलह का सामना कर रहा है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि यह रिपोर्ट केवल पुरानी और बेबुनियाद बातों का एक संग्रह मात्र है। स्पष्ट किया गया है कि कतर की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद पूरी तरह से मानवीय उद्देश्यों के लिए थी, जिसका मकसद गाजा पट्टी में स्थिरता और शांति बनाए रखना था। कतर ने भी इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि खाड़ी देश को राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाया जा रहा है। इस घटनाक्रम से मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक नया तनाव पैदा हो गया है।
