राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO: पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति, जानें क्या है नई व्यवस्था
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। यह महत्वपूर्ण नियुक्ति मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले के सामने आने के तीन महीने बाद हुई है, जिसके बाद ट्रस्ट के कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मिश्रा, जिन्होंने भारतीय वायु सेना में 39 साल सेवा दी है और ऑपरेशन सिंदूर का नेतृत्व किया है, अब मंदिर के दैनिक प्रबंधन, सुरक्षा, चढ़ावे की निगरानी और निर्माण कार्यों की देखरेख करेंगे।
इस बदलाव के तहत, राम मंदिर के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को नया सचिव बनाया गया है। साथ ही, ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है: दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय, और RSS समर्थक निर्मला यादव। निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी। यह फेरबदल मंदिर में हाल ही में सामने आए चढ़ावे की चोरी के मामले के बाद हुआ है, जिसमें आठ आरोपी जेल में हैं।
CEO की नियुक्ति की आवश्यकता मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और दैनिक व्यवस्था, सुरक्षा व निगरानी के लिए एक पूर्णकालिक अधिकारी की जरूरत से प्रेरित है। ट्रस्ट ने सरकारी अधिकारियों के बजाय रिटायर्ड अधिकारी को प्राथमिकता दी ताकि मंदिर का प्रशासन सीधे ट्रस्ट के नियंत्रण में रहे। तीन सदस्यों की एक समिति ने उम्मीदवारों की छंटनी कर मिश्रा के नाम का प्रस्ताव रखा था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया।
CEO के नेतृत्व में इंजीनियर, फाइनेंशियल एक्सपर्ट और लगभग 1,500-2,000 कर्मचारियों की एक प्रोफेशनल टीम काम करेगी। यह टीम मंदिर के चेयरमैन और CEO के निर्देशन में रोजाना के कामकाज को संभालेगी।
राम मंदिर की संपत्ति की बात करें तो, ट्रस्ट के पास अब तक 32 किलो सोना और 1518 किलो चांदी चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुई है। चांदी को शुद्ध ईंटों में परिवर्तित कर बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा गया है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न बैंकों में ट्रस्ट के खातों में ₹1876 करोड़ रुपए नकद जमा हैं। मंदिर निर्माण के लिए ₹3264 करोड़ की समर्पण निधि मिली थी, जिसमें से ₹2370 करोड़ मंदिर निर्माण पर और ₹391 करोड़ प्रबंधन पर खर्च किए गए हैं।
