अवध बार एसोसिएशन में महिला अधिवक्ताओं के लिए 30% आरक्षण अनिवार्य: हाईकोर्ट का अहम फैसला
लखनऊ हाईकोर्ट ने अवध बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी में महिला अधिवक्ताओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण को अनिवार्य कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बार एसोसिएशनों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश बाध्यकारी हैं और उनका पालन किया जाना चाहिए। यह आदेश दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया गया, जिसमें महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षण की मांग की गई थी।
इस फैसले का सीधा असर यह होगा कि अब बार एसोसिएशनों में महिला वकीलों की आवाज और प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
न्यायालय ने अवध बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी के कुल 22 पदों में से महिलाओं के लिए कम से कम सात पद आरक्षित करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने विस्तृत आदेश में यह भी तय किया है कि किस चुनाव में कौन से पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे और उनका रोटेशन कैसे होगा। उदाहरण के लिए, 2026 के चुनावों में कनिष्ठ कार्यकारिणी, वरिष्ठ कार्यकारिणी और संयुक्त सचिव के कुछ पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे। कोषाध्यक्ष का पद पहले से ही 2026 के लिए महिलाओं के लिए आरक्षित है और यह रोटेशन के आधार पर आगे भी आरक्षित रहेगा।
इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ उपाध्यक्ष का पद 2026 में और अध्यक्ष का पद 2028 में महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा। महासचिव का पद 2027 में आरक्षित होगा। न्यायालय ने यह भी व्यवस्था दी है कि यदि किसी आरक्षित पद पर योग्य महिला उम्मीदवार न मिले, तो लखनऊ पीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा किसी महिला अधिवक्ता को नामित किया जाएगा।
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