कानपुर के पेड़-पौधों को मिलेगी एसटीपी के शोधित पानी से जान, ग्रीन सिटी का सपना होगा साकार
कानपुर शहर को हरा-भरा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के निर्देशानुसार, शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से शोधित पानी का उपयोग अब पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए किया जाएगा। इस योजना के तहत, नगर निगम, रेलवे, एयरपोर्ट और विभिन्न निजी कंपनियों को शोधित सीवरेज का पानी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
जाजमऊ एसटीपी से निकलने वाले शोधित जल का प्रयोग पहले से ही सिंचाई कार्यों में किया जा रहा है, लेकिन पानी की निरंतर आवश्यकता न होने के कारण यह अक्सर व्यर्थ बहकर गंगा में मिल जाता था। पनकी एसटीपी के शोधित सीवरेज का उपयोग थर्मल पावर प्लांट में चिमनी को ठंडा करने के लिए भी होता है। मई में एनएमसीजी द्वारा जारी एक आदेश में एसटीपी से शोधित पानी का उपयोग अन्य संस्थाओं द्वारा भी करने के निर्देश दिए गए थे।
इस आदेश के क्रम में, एनएमसीजी द्वारा नामित एक एजेंसी ने जल निगम ग्रामीण के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में नगर निगम, रेलवे, एयरपोर्ट और निजी कंपनियों को जलापूर्ति की संभावनाओं पर चर्चा की गई। जल निगम ग्रामीण के अधिकारियों ने बताया कि ट्रेनों की धुलाई में बड़ी मात्रा में पानी की खपत होती है, और शोधित सीवरेज का उपयोग ट्रेनों व प्लेटफॉर्म की धुलाई के लिए किया जा सकता है। इसके लिए पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
संबंधित विभागों से बातचीत के बाद इस योजना पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। एनएमसीजी के इस कदम से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और शहर के हरित आवरण को बढ़ाने में मदद मिलेगी। सुधीर कुमार, मुख्य अभियंता, जल निगम ग्रामीण ने बताया कि शोधित सीवरेज के रियूज का मसौदा संबंधित विभागों से संपर्क कर पेश किया जाएगा।
