अलीगढ़ हनीट्रैप कांड: BJP में हलचल, टिकट की रेस में शामिल नेताओं पर गिरी गाज
अलीगढ़ के बहुचर्चित हनीट्रैप कांड ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थानीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस मामले में बरौली चेयरमैन मनोज कुमार सिंह और भाजपा महानगर मीडिया प्रभारी निधीश कुमार भट्ट जैसे प्रमुख नेताओं के नाम सामने आने के बाद पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो इस प्रकरण में कुछ ऐसे जनप्रतिनिधियों और बड़े नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, जो आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के टिकट की दौड़ में शामिल हैं।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब भाजपा के महानगर मीडिया प्रभारी निधीश कांत भट्ट ने पांच अगस्त को एक मुकदमा दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूजा नामक महिला और वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कौशिक ने उन्हें हनीट्रैप में फंसाकर दो लाख रुपये की वसूली की है। पुलिस ने काजल उर्फ पूजा और उसके पति श्रवण कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद, चेयरमैन मनोज सिंह ने भी क्वार्सी थाने में एक दूसरा मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने बताया कि वह फेसबुक मैसेंजर के माध्यम से महिला के संपर्क में आए थे। इन घटनाओं के बाद से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों के नाम इस प्रकरण से जुड़ने लगे हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हनीट्रैप से जुड़े इस पूरे प्रकरण ने भाजपा संगठन के भीतर भी चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के कई पदाधिकारी मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर उन नेताओं के लिए जो विधानसभा चुनाव में टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या वाकई इसमें जनप्रतिनिधि और भाजपा के बड़े पदाधिकारी शामिल हैं? क्या सामने आ रहे नाम केवल चर्चाओं तक सीमित हैं या जांच में भी उनका कोई संबंध सामने आया है? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल, इस हनीट्रैप कांड ने भाजपा की स्थानीय राजनीति में निश्चित रूप से हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े तथ्यों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि हनीट्रैप गिरोह का दायरा केवल भाजपा नेताओं तक सीमित नहीं है। गिरोह के झांसे में 9 से 10 अन्य लोग भी फंस चुके हैं, जिनमें एक होटल कारोबारी, कचौड़ी विक्रेता और खैर क्षेत्र का एक ग्राम प्रधान भी शामिल है। मंगलवार को दो-तीन पीड़ित सीओ द्वितीय से मिलकर अपनी आपबीती सुना चुके हैं, लेकिन बदनामी के डर से कोई भी लिखित शिकायत दर्ज कराने को तैयार नहीं है। इस मामले में नामजद वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कौशिक अभी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।
सीओ द्वितीय धनंजय सिंह के अनुसार, 9 से 10 और पीड़ितों के फंसने के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस इन लोगों को विश्वास में लेकर तहरीर दर्ज कराने का प्रयास कर रही है। अब तक तीन मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जिनमें भाजपा नेता और बरौली चेयरमैन के अलावा सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने का एक मुकदमा भी शामिल है। पुलिस सीडीआर और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपों की जांच कर रही है।
इस मामले में नामजद अधिवक्ता अनूप कौशिक ने एसएसपी और एसपी सिटी को पत्र भेजकर खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बार एसोसिएशन चुनाव से पहले उनकी छवि खराब करने के लिए उन्हें फंसाया जा रहा है। कौशिक बार एसोसिएशन के महासचिव रह चुके हैं और अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ चुके हैं।
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