लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे: घटिया निर्माण से धंसी सड़कें, फाइलों में दबे राइट्स के सुझाव
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में घटिया निर्माण के कारण सड़कें बार-बार धंसने की समस्या गंभीर हो गई है। वर्ष 2016 में लोकार्पण के बाद से यह एक्सप्रेसवे आठ बार धंस चुका है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राइट्स की रिपोर्ट और अनदेखी
एक्सप्रेसवे के धंसने की जांच रेल इंडिया तकनीकी एवं आर्थिक सेवा (राइट्स) ने की थी। राइट्स ने उप्र एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में वर्षा जल निकासी प्रणाली की खामियों और छोटे व्यास के पाइपों के इस्तेमाल जैसी समस्याओं को उजागर किया गया था। इसके बावजूद, राइट्स द्वारा दिए गए सुझावों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और वे फाइलों में ही दबे रह गए।
न्यू दक्षिणी बाइपास की भी यही स्थिति
यही स्थिति न्यू दक्षिणी बाइपास की भी है, जिसका निर्माण भी पीएनसी इंफ्राटेक ने किया था। यह सड़क भी पहली बरसात नहीं झेल सकी और कई बार धंस गई। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों ने निरीक्षण तो किया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जनता पर असर
इन निर्माण खामियों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। बार-बार सड़कों के धंसने से यातायात बाधित होता है, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और मरम्मत पर सरकारी धन की बर्बादी होती है। वर्षा जल निकासी की समस्या के कारण अंडरपास और खेतों में पानी भर जाता है, जिससे किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ता है।
