कानपुर में बच्चों से भीख मंगवाने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। समाज कल्याण विभाग की 'स्माइल' योजना के तहत कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि मध्य प्रदेश के...
कानपुर में बच्चों से भीख मंगवाने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। समाज कल्याण विभाग की ‘स्माइल’ योजना के तहत कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि मध्य प्रदेश के रीवा से बच्चों को लाकर उनसे भीख मंगवाई जा रही है। सर्वे करने वाली टीम ने कई चौराहों पर ‘दादी’ की उम्र की महिलाओं को बच्चों के साथ भीख मांगते हुए देखा।
सर्वे के अनुसार, कानपुर जिले में कुल 858 भिखारी सक्रिय हैं, जिनमें बच्चों और किशोरियों की संख्या सबसे अधिक है। इनमें से 38% भिखारी रीवा से ताल्लुक रखते हैं। भीख मांगने वाले ये बच्चे और किशोर-किशोरियां उन्हें ‘दादी’ कहकर संबोधित करते हैं। शाम होते ही ये महिलाएं बच्चों से भीख का कलेक्शन लेकर उन्हें ले जाती हैं। अब इन भिखारियों को पनकी स्थित शेल्टर होम में पुनर्वासित करने की योजना है। यह सर्वे अभी भी जारी है।
शहर के कारगिल पार्क, कंपनी बाग, टाटमिल चौराहा, रेलवे स्टेशन और मरियमपुर जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा बच्चे भीख मांगते हुए पाए जाते हैं। इन भिखारियों को तीन मुख्य वर्गों में बांटा गया है: पहला, जिनका यह पारिवारिक पेशा है; दूसरा, जो आर्थिक तंगी के कारण भीख मांगने को मजबूर हैं; और तीसरा, जो किसी डर या चंगुल में फंसकर यह काम कर रहे हैं।
सर्वे में यह भी पता चला है कि मंदिरों में सोमवार, मंगलवार और शनिवार को भिखारियों की भीड़ सबसे ज्यादा होती है। ये भिखारी अपनी शिफ्ट के अनुसार अलग-अलग मंदिरों में जाकर भीख मांगते हैं, जैसे सोमवार को परमट, मंगलवार को पनकी, बुधवार को गणेश मंदिर, गुरुवार को बृहस्पति मंदिर और शनिवार को शनि मंदिर।
इस प्रकार की मानव तस्करी और बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई अन्य जिलों में भी हो रही है। उदाहरण के तौर पर, अलीगढ़ पुलिस ने इसी साल 111 बच्चों को फैक्ट्रियों और ढाबों से मुक्त कराकर उन्हें शिक्षा की राह दिखाई है। साथ ही, आठ नाबालिग लड़कियों की शादी भी समय रहते रुकवाई गई है, जो मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इन घटनाओं से पता चलता है कि किस तरह बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।