कानपुर में बोले विधायक नीलिमा कटियार: बदलें खुद को, पर सनातन संस्कृति न भूलें
कानपुर में अखिल भारतीय गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, जवाहर नगर में शिक्षक गरिमा सम्मान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि एवं विधायक नीलिमा कटियार ने अपने संबोधन में कहा, “हम बदलेंगे तो युग बदलेगा।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति को आत्म-सुधार करना चाहिए, लेकिन अपनी सनातन संस्कृति की जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। विधायक कटियार ने आगे कहा कि देश की अस्मिता पर कई बार हमले हुए, लेकिन शिक्षकों ने अपने नैतिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए देश को संभाला।
इस अवसर पर एमएलसी अरुण पाठक ने उपस्थित लोगों को धनवान और बलवान बनने की प्रेरणा दी, लेकिन साथ ही संस्कारों को सर्वोपरि रखने की सीख दी। उन्होंने कहा कि एक संस्कारी व्यक्ति जीवन की किसी भी परीक्षा में असफल नहीं हो सकता। उन्होंने एक मूर्तिकार का उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार मूर्तिकार मिट्टी की अवांछित चीजों को हटाकर एक सुंदर मूर्ति गढ़ता है, उसी प्रकार शिक्षक का कार्य किशोरों और युवाओं की बुराइयों को दूर कर उन्हें तराशना है, ताकि वे एक संस्कारी नागरिक बन सकें। सीएसजेएमयू के डा. हिमांशु त्रिवेदी ने कहा कि सनातन संस्कृति बच्चों में संस्कारों के माध्यम से देवत्व का भाव जागृत करती है, और गुरु का भी यह कर्तव्य है कि वह शिष्य के प्रति ऐसा ही भाव रखे। कार्यक्रम का संचालन समर बहादुर ने एकल गीत “संस्कृति रही कराह…” की प्रस्तुति के साथ किया। इस आयोजन में सह जिला विद्यालय निरीक्षक प्रशांत द्विवेदी, जिला संयोजक सुरेश जोशी, आरपी लाल, रामचंद्र गुप्त, डॉ. रामकिशोर, ओमप्रकाश सिंह, गिरीश मिश्र, मनप्रीत सिंह, पूजा अवस्थी, ममता तिवारी, आकांक्षा जौहरी और शिवानी सिंह भी उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम समाज में सांस्कृतिक मूल्यों और संस्कारों के महत्व को रेखांकित करता है, जो युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
