रणबीर कपूर की फिल्म रामायण पर छिड़ा विवाद, जानें फिल्मों की negative publicity का सच
सिनेमाई दुनिया में इन दिनों रणबीर कपूर की मेगा-ब बजट फिल्म ‘रामायण’ का पोस्टर सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जन्माष्टमी जैसे पावन पर्व पर रावण का पोस्टर जारी होने के बाद से ही दर्शकों और फिल्म समीक्षकों के बीच भारी रोष देखने को मिल रहा है। इस चूक ने फिल्म की रिसर्च टीम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां चार हजार करोड़ के बजट वाली फिल्म से ऐसी गलती की उम्मीद किसी को नहीं थी।
नेगेटिव पब्लिसिटी का सिनेमाई गणित
फिल्म जगत का एक वर्ग यह मानता है कि इस तरह की रणनीतिक गलतियां अनजाने में नहीं बल्कि चर्चा में बने रहने के लिए जानबूझकर की जाती हैं। जब कोई फिल्म लगातार सुर्खियों में रहती है, तो आम जनमानस में उसके प्रति उत्सुकता स्वतः बढ़ जाती है। द कश्मीर फाइल्स, पद्मावत और द केरला जैसी फिल्मों के उदाहरण बताते हैं कि किस प्रकार शुरुआती विरोध और विवादों ने इन फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।
जनता पर प्रभाव और भविष्य की राह
हालांकि, हर बार नकारात्मक प्रचार फायदेमंद साबित हो, यह जरूरी नहीं है। यदि विवाद फिल्म के मूल ताने-बाने या जनभावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाए, तो इसका विपरीत असर भी देखने को मिल सकता है। निर्माताओं और दर्शकों के बीच का यह मनोवैज्ञानिक खेल इस बात पर निर्भर करता है कि अंततः कहानी पर्दे पर कैसी उतरती है और लोग उसे किस रूप में स्वीकार करते हैं।
