वर्मी कम्पोस्ट की बढ़ी मांग से पंचायतों की आय में इजाफा, जानिए कैसे
कानपुर की ग्राम पंचायतों में स्थापित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) अब केवल कचरा निस्तारण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पंचायतों की आय का एक महत्वपूर्ण जरिया बन गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत तैयार की जा रही उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कम्पोस्ट की मांग में वृद्धि हुई है। वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के दौरान इस वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री से पंचायतों को करीब 40 हजार रुपये का आर्थिक लाभ हुआ है, जिसे ग्राम पंचायतों के ओन सोर्स रेवेन्यू (ओएसआर) खाते में जमा किया जाएगा।
जिले की रमईपुर, रामपुर भीमसेन, चौबेपुर कलां, बगदौदी बांगर, बिल्हौर देहात, उत्तरी, पतारा और मंझावन जैसी कई ग्राम पंचायतों में पंचायती राज विभाग द्वारा घर-घर से गीले कचरे को एकत्र कर उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया से उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कम्पोस्ट तैयार हो रही है। रमईपुर से 3,150 किलोग्राम, रामपुर भीमसेन से 1,200 किलोग्राम, चौबेपुर कलां से 1,030 किलोग्राम और मंझावन से 650 किलोग्राम, कुल 6,030 किलोग्राम वर्मी कम्पोस्ट 15 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची गई है।
इस बिक्री से प्राप्त लगभग 40 हजार रुपये की राशि संबंधित ग्राम पंचायतों के ओएसआर खाते में जमा होगी। इस धनराशि का उपयोग पंचायतें संविधान की 29 आरक्षित विषयों से संबंधित विकास कार्यों में कर सकेंगी। भविष्य में नगर निगम, कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए), उद्यान विभाग और अन्य सरकारी विभागों को भी वर्मी कम्पोस्ट की आपूर्ति करने की योजना है। जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार ने इस पहल को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की एक सफल पहल बताया है। यह पहल न केवल कचरा प्रबंधन में सहायक है, बल्कि स्थानीय निकायों के लिए एक स्थायी आय स्रोत भी प्रदान करती है।
