सात दशकों में भारत का खाद्य उत्पादन सात गुना बढ़ा, कृषि क्षेत्र नई चुनौतियों के दौर में
राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनबीआरआई) में आयोजित ‘प्रो. के.एन. कौल स्मृति व्याख्यान’ में अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने भारत की कृषि प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1950 के दशक के खाद्यान्न संकट से निकलकर भारत 2010 तक खाद्य अधिशेष राष्ट्र बन गया। पिछले सात दशकों में देश का कुल खाद्य उत्पादन लगभग सात गुना बढ़ा है।
यह उपलब्धि भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो देश की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
हालांकि, डॉ. पाठक ने आगाह किया कि वर्तमान में भारतीय कृषि नई चुनौतियों का सामना कर रही है। बढ़ती जनसंख्या का दबाव, जलवायु परिवर्तन के अप्रत्याशित प्रभाव और प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण कृषि उत्पादकता और स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने उत्पादकता और स्थिरता में सुधार के लिए कृषि के परिवर्तनकारी मॉडल को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर एनबीआरआई के निदेशक डॉ. ए.के. शासनी ने भी संस्थान के संस्थापक निदेशक प्रो. कैलाश नाथ कौल के योगदान को याद किया।
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