मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के हिंदी पाठ्यक्रम में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड शामिल, UP education में नया अध्याय
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने एक अभूतपूर्व शैक्षणिक निर्णय लेते हुए अपने हिंदी पाठ्यक्रम में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड को शामिल किया है। इस कदम से देवी पाटन मंडल के अंतर्गत आने वाले 174 महाविद्यालयों के हजारों विद्यार्थी प्रभावित होंगे। विश्वविद्यालय का मानना है कि यह पहल शिक्षा को भारतीय संस्कृति, आध्यात्म और स्थानीय परंपराओं से जोड़ने का एक क्रांतिकारी प्रयास है।
विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण दावा किया है कि हनुमान चालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदास (काशी) की नहीं, बल्कि बलरामपुर के तुलसीपुर क्षेत्र के संत तुलसीदास की है। यह तथ्य, जो पहले व्यापक रूप से ज्ञात नहीं था, कल्याण पत्रिका और तुलसी ग्रंथावली में भी उल्लिखित है।
पाठ्यक्रम में बदलाव के तहत, बीए प्रथम वर्ष के हिंदी पाठ्यक्रम में अब अयोध्याकांड (दोहा 28 से 41) और रामलला नहछू को जोड़ा गया है। एमए प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में सुंदरकांड को शामिल किया गया है, जिससे छात्रों को तुलसीदास के काव्य कौशल और भक्ति दर्शन की गहराई समझने का अवसर मिलेगा।
कुलपति प्रोफेसर रविशंकर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा को संस्कृति से जोड़ना है, ताकि विद्यार्थी अपनी भाषा और परंपरा को समझ सकें। यह नया पाठ्यक्रम सितंबर 2025 में स्वीकृति के बाद नए सत्र से लागू होगा। विश्वविद्यालय के सदस्यों का मानना है कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देगा।
