फर्जी डॉक्टर का पश्चिमी यूपी में फैला नेटवर्क, सोशल मीडिया से जुड़ा था गिरोह
केजीएमयू से गिरफ्तार फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद ने लखनऊ के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपना जाल फैला रखा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद केजीएमयू से जुड़े उसके कई लैब टेक्नीशियन और डॉक्टरों ने अपने मोबाइल बंद कर दिए हैं, जिससे जांच एजेंसियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब हस्साम और उससे जुड़े लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और उनकी गतिविधियों का पता लगाया जा सके।
अस्पतालों में मरीज भेजने का मिलता था मोटा कमीशन
चौक पुलिस की जांच में सामने आया है कि हस्साम मेरठ, गाजियाबाद और बिजनौर जैसे शहरों में भी सक्रिय था। इन शहरों के कई अस्पतालों से उसका गठजोड़ था, जहां वह सस्ते इलाज के नाम पर मरीजों को भर्ती कराता था और बदले में मोटा कमीशन लेता था। इसी कमीशन के पैसे से वह अपने मेडिकल कैंप का खर्च चलाता था।
सोशल मीडिया पर चलता था पूरा नेटवर्क
इस गिरोह का संचालन मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से होता था। हस्साम ने व्हॉट्सएप ग्रुप बना रखे थे, जिनके जरिए वह मरीजों की जानकारी लेता था और कमीशन की राशि तय करता था। पुलिस को इस संबंध में अहम सबूत मिले हैं।
गरीबों को धर्मांतरण के लिए उकसाने का भी आरोप
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह इलाज कराने में असमर्थ गरीब हिंदुओं को निशाना बनाता था। उनकी मदद का भरोसा दिलाकर, विश्वास जीतने के बाद उन्हें धर्मांतरण के लिए उकसाया जाता था। यह खुलासा मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है।
