लखनऊ में नकली नोटों का जखीरा पकड़ा, अंडरवर्ल्ड और नेपाल कनेक्शन की जांच
राजधानी लखनऊ में नकली नोटों के एक बड़े जखीरे का खुलासा हुआ है। मड़ियांव पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से लाखों रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं। इस घटना ने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की आशंकाओं को जन्म दिया है, जिसके चलते उच्च अधिकारियों को तुरंत सूचित किया गया। इसके बाद एटीएस, आईबी, एलआईयू और अन्य खुफिया एजेंसियों ने थाने पहुंचकर तस्करों से गहन पूछताछ की। पुलिस और अन्य एजेंसियां अब गिरोह के मास्टरमाइंड भाइयों की तलाश में जुटी हैं, जिनके नेपाल, खाड़ी देशों और अंडरवर्ल्ड से संबंध होने का संदेह जताया जा रहा है।
नकली नोटों की तस्करी का यह मामला मड़ियांव थाना क्षेत्र के घैला पुल के पास एक टिन शेड के नीचे से सामने आया। गिरफ्तार किए गए तस्करों की पहचान आजमगढ़ निवासी आलोक सिंह, मुबारक पट्टी निवासी सोनू गौड़ उर्फ गोलू और सिधारी निवासी बृजेश विश्वकर्मा के रूप में हुई है। अपर पुलिस उपायुक्त उत्तरी गोपाल कृष्ण चौधरी के अनुसार, मुखबिर की सूचना पर अपर पुलिस उपायुक्त (क्राइम) ट्विंकल जैन और एसीपी अलीगंज शशि प्रकाश मिश्र के निर्देशन में मड़ियांव पुलिस और क्राइम टीम ने संयुक्त कार्रवाई की।
इंस्पेक्टर मड़ियांव शिवानंद मिश्रा और उनकी टीम ने तीनों संदिग्धों को पकड़ा। उनके बैग से भारी मात्रा में नकली नोट मिले। पूछताछ में पता चला कि ये तीनों तस्कर हैं और आजमगढ़ से लखनऊ में डिलीवरी देने आए थे। बरामद नोटों में 500 रुपये के 14 गड्डियां (कुल 1402 नोट) और 100 रुपये के 70 गड्डियां (कुल 6946 नोट) शामिल हैं। इस प्रकार कुल 13 लाख 95 हजार 600 रुपये के नकली नोट बरामद हुए हैं।
एसीपी अलीगंज शशि प्रकाश मिश्र ने बताया कि पकड़े गए नोटों की फिनिशिंग इतनी अच्छी है कि आम लोग इन्हें आसानी से असली समझ सकते हैं। नोटों का प्रिंट, आकार और कटिंग बिल्कुल असली नोटों जैसी है। गिरोह से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। सरगना भाइयों की तलाश में कई टीमें आजमगढ़ और अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस गिरोह के अंडरवर्ल्ड, नेपाल और खाड़ी देशों से कनेक्शन की भी जांच कर रही है। इसके अलावा, नोटों की छपाई से जुड़े संभावित ठिकानों की भी आजमगढ़ और बनारस जैसे शहरों में जांच की जा रही है। यह भी संदेह है कि कहीं यह गिरोह खुद ही प्रिंटिंग मशीन लगाकर नोटों की छपाई तो नहीं कर रहा है, जैसा कि हाल ही में आजमगढ़ में पकड़े गए एक गिरोह के मामले में सामने आया था।
इंस्पेक्टर मड़ियांव शिवानंद मिश्रा के मुताबिक, पकड़े गए तस्कर केवल ‘कैरियर’ के रूप में काम कर रहे थे और पिछले करीब एक साल से नकली नोटों की डिलीवरी दे रहे थे। गिरोह का मुख्य सरगना आजमगढ़ निवासी मंजीत प्रधान और उसका भाई संतोष है, जिनके इशारे पर यह तीनों काम करते थे। यह गिरोह एक लाख रुपये के असली नोटों के बदले तीन लाख रुपये के नकली नोटों का सौदा करता था। इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।
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