अलीगढ़ में BJP के नामित पार्षदों पर बवाल, 6 महीने से गुमशुदा व्यक्ति को बनाया पार्षद; विरोधियों को भी मिला इनाम
अलीगढ़ नगर निगम के लिए 10 नामित पार्षदों की सूची जारी होने के बाद भाजपा संगठन के भीतर ही विवाद खड़ा हो गया है। इन नामों के चयन में पार्टी के निर्धारित नियमों की अनदेखी करने का आरोप लग रहा है। सबसे चौंकाने वाला मामला यह है कि एक ऐसा व्यक्ति नामित पार्षद बनाया गया है जो पिछले छह महीने से गुमशुदा चल रहा है।
नामित पार्षदों की सूची में विपिन चंचल बाल्मीकि का नाम शामिल है, जो बाड़ा गौहर अली, समना पाड़ा के निवासी हैं। जानकारी के अनुसार, विपिन चंचल बाल्मीकि वर्ष 2025 से ही गुमशुदा हैं और उनके परिजनों ने सासनीगेट थाने में गुमशुदगी भी दर्ज कराई है। थाने के इंस्पेक्टर ने भी इसकी पुष्टि की है। इसके बावजूद, संगठन ने उनका नाम नामित पार्षद के रूप में प्रस्तावित किया और शासन ने उसे मंजूरी दे दी।
नामित पार्षदों के चयन में नियमों की अनदेखी का एक और उदाहरण सामने आया है। निकाय चुनाव के दौरान वार्ड-60 गांधीनगर क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी राजबहादुर गुप्ता के खिलाफ पार्टी के पुराने पदाधिकारी सुभाष गुप्ता ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। अब सुभाष गुप्ता को भी नामित पार्षद बना दिया गया है। इसी तरह, नीलेश उपाध्याय को भी नामित पार्षद बनाया गया है, जबकि वह भी पार्टी प्रत्याशी के सामने चुनाव लड़ चुके हैं। संगठन के भीतर चर्चा है कि बगावत करने वालों को इस तरह से सम्मानित करने से कर्मठ कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरेगा।
इसके अलावा, वार्ड-76 बेगमबाग में पहले से ही भाजपा की पार्षद दीपू शर्मा मौजूद हैं, लेकिन इसी वार्ड से दो अन्य नामित पार्षद (वेदप्रकाश सिसोदिया और वीरेन्द्र सिंह सविता) बनाए गए हैं। पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि नामित पार्षदों को उन क्षेत्रों में नियुक्त किया जाना चाहिए था जहां पार्टी कमजोर है, न कि उन क्षेत्रों में जहां पहले से ही पार्षद मौजूद हैं।
भाजपा महानगर अध्यक्ष राजीव शर्मा ने इस विवाद पर कहा कि नामित पार्षदों में वरिष्ठ और लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले लोगों को शामिल किया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि विपिन चंचल के नाम को लेकर विचार चल रहा है क्योंकि नाम काफी पहले तय हो गए थे और घोषणा अब हो पाई है।
