शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार पर साधा निशाना, कहा- गेरुआ राज में सनातन पर डंडे बरस रहे | Shankaracharya news
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में ‘ग में अपने ‘गौ-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान’ की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘कालनेमि’ कहकर संबोधित किया, जिसका अर्थ है बाहर से साधु का वेश धारण करना लेकिन अंदर से राक्षस जैसा होना। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि योगी सरकार में गौ-हत्यारों को संरक्षण मिल रहा है और पुलिस सनातन धर्म के प्रतीकों पर प्रहार कर रही है।
गौ-रक्षा और सनातन प्रतीकों के अपमान के मुद्दे पर शंकराचार्य ने कहा कि जब प्रदेश की गद्दी पर एक गेरुआधारी योगी बैठा, तो उन्हें लगा कि अब गौ माता की रक्षा अवश्य होगी। लेकिन, अब उसी गेरुआ राज में पुलिस साधु-संतों और ब्राह्मण बटुकों पर डंडे बरसा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में नहीं है, बल्कि गौ माता की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध का शंखनाद करने के लिए है।
‘जजिया कर’ जैसी शर्तें
कार्यक्रम के आयोजन के लिए लगाई गई शर्तों और शुल्क पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह स्थिति मुगलकाल में ‘जजिया’ कर देने जैसी प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि मुगल शासन में भी हम जजिया कर देकर अपने धर्म का पालन करते थे। आज योगी राज में भी यदि धर्म के कार्य के लिए जजिया देना पड़े, तो हम वह भी देंगे।
अखिलेश यादव ने भी साधा निशाना
इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर भाजपा सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि भाजपाई सनातन का सम्मान नहीं कर सकते हैं तो भले न करें, परंतु अपमान भी न करें। उन्होंने आरोप लगाया कि उप्र की अहंकारी सरकार जिस समाज विशेष के मान की बाँह मरोड़ रही है, वह बात उस समझदार समाज को समझ आ रही है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा के जनप्रतिनिधि अपने ही समाज में सम्मान खो चुके हैं और जनता अगले चुनाव में उन्हें सबक सिखाएगी।
अभियान की शुरुआत काशी से हुई थी, जो जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली और नैमि और नैमि और नैमिषारण्य जैसे कई धार्मिक केंद्रों से होते हुए लखनऊ पहुंची है। आज के मुख्य कार्यक्रम में प्रदेशभर से भारी संख्या में संत समाज और गौ-भक्तों के जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए लखनऊ पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
