मिडिल ईस्ट तनाव का असर: UP export news, 3000 करोड़ के कारोबार पर संकट
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों कानपुर, आगरा, नोएडा और मुरादाबाद में निर्यातकों के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही है। मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने यूपी के निर्यात कारोबार पर सीधा दबाव डाला है। खाड़ी मार्ग से यूरोप के बाजारों तक जाने वाली करोड़ों की खेप बीच रास्ते में अटकी हैं, जिससे प्रदेश का लगभग 3000 करोड़ रुपये का कारोबार दांव पर है।
यूपी से लेदर, गारमेंट, इलेक्ट्रानिक, इंजीनियरिंग, हैंडीक्राफ्ट और केमिकल जैसे उत्पाद दुबई, यूएई, ओमान और कतर के रास्ते जर्मनी, फ्रांस, इटली और यूके समेत दो दर्जन यूरोपीय देशों को भेजे जाते हैं। मौजूदा तनाव के कारण कई कंटेनर ट्रांजिट पोर्ट पर रुके हुए हैं। शिपिंग लाइनों ने जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है, जिससे ढुलाई दरों में अचानक उछाल आया है।
कानपुर की लेदर निर्यातक प्रेरणा वर्मा के अनुसार, जंग की वजह से खाड़ी देशों के रास्ते यूरोपियन देशों तक माल समय पर पहुंचाना मुश्किल हो गया है। यूरोपीय खरीदार समय पर डिलीवरी न होने पर पेनाल्टी लगाते हैं। इस बार देरी हालात की वजह से है, फिर भी नुकसान निर्यातकों को ही उठाना पड़ेगा। प्लास्टिक निर्यातक मनोज शुक्ला ने छोटे और मझोले निर्यातकों के लिए कार्यशील पूंजी की चुनौती को सबसे बड़ी समस्या बताया है।
इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन (आईआईए) और काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स (सीएलई) के प्रतिनिधियों ने इस स्थिति को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि यूरोप के साथ मजबूत बाजार होने के बावजूद लॉजिस्टिक अनिश्चितता पूरी सप्लाई चेन को झकझोर रही है। अगर यह स्थिति लंबी खिंची तो जर्मनी, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम जैसे मजबूत बाजारों में यूपी की पैठ कमजोर पड़ सकती है।
निर्यात महासंघ के सहायक निदेशक एके श्रीवास्तव के अनुसार, कारोबारी गतिविधियां बिगड़ने से कानपुर समेत प्रदेश भर के अलग-अलग सेक्टरों को झटका लग रहा है। जल्द वैकल्पिक शिपिंग रूट और बीमा राहत नहीं मिली तो प्रदेश का निर्यात लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।
