लखनऊ: कथाकार अमृतलाल नागर के खंडहर आवास पर श्रद्धांजलि, साहित्य पर चर्चा | Lucknow News
लखनऊ में अमर कथाकार अमृतलाल नागर को रविवार को शहर के प्रबुद्धजनों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके खंडहर में तब्दील हो चुके आवास पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद बान वाली गली स्थित सेठ पन्नालाल अग्रवाल धर्मशाला में ‘लोक चौपाल’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नागर जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें उनकी साहित्यिक विरासत को सहेजने पर जोर दिया गया। यह साहित्यिक आयोजन राजधानी के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटना है।
लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा आयोजित इस चौपाल में लोक संस्कृति विशेषज्ञ शाखा बंद्योपाध्याय ने नागर जी से जुड़े संस्मरण साझा किए। उन्होंने उनकी रचनाधर्मिता, सहजता, सरलता और व्यापक लोक-स्वीकार्यता पर प्रकाश डाला। बंद्योपाध्याय ने नागर जी की कृतियों के डिजिटलीकरण के लिए उनके पुत्र शरद नागर और प्रपौत्रियों प्रो. ऋचा नागर व डा. दीक्षा नागर के प्रयासों की सराहना की, जिससे उनकी रचनाएं नई पीढ़ी तक पहुंच सकें।
नागर जी के उपन्यास ‘नाच्यो बहुत गोपाल’ के लेखन काल में उनके लिपिक रहे राजेन्द्र वर्मा ने उनके लेखकीय अनुशासन, शोधपरक दृष्टि और जीवंत कथन-शैली को रेखांकित किया। संचित स्मृति ट्रस्ट के प्रतिनिधि नरेन्द्र वर्मा ने प्रो. ऋचा नागर एवं डा. दीक्षा नागर के संदेशों का वाचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार दयानंद पाण्डेय ने बताया कि नागर जी अक्सर अपने उपन्यास बोलकर लिखवाते थे। उन्होंने फिल्म कथा-पटकथा लेखन से लेकर सामाजिक-ऐतिहासिक विषयों तक व्यापक अनुभव अर्जित किया था। पाण्डेय ने ‘खंजन नयन’, ‘सुहाग के नूपुर’, ‘शतरंज के मोहरे’, ‘ये कोठे वालियां’ और ‘गदर के फूल’ जैसी कृतियों को उनकी शोध-संपन्न लेखनी का प्रमाण बताया।
चौपाल में डा. अपूर्वा अवस्थी ने नागर जी द्वारा लिखे जयशंकर प्रसाद के संस्मरण का वाचन किया, जबकि चौपाल प्रभारी अर्चना गुप्ता ने नागर जी की रचना को स्वर दिया। साहित्यकार डा. करुणा पाण्डे ने नागर जी की रचनाओं को ऐतिहासिक दस्तावेज करार दिया। संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी ने नागर जी की साहित्यिक धरोहर के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार हेतु निरंतर प्रयास करने का संकल्प व्यक्त किया, ताकि नई पीढ़ी उनके लोकनिष्ठ साहित्य से प्रेरणा ले सके। इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष जीतेश श्रीवास्तव, सोशल लाइफलाइन फाउण्डेशन के अध्यक्ष डा. अनिल कुमार गुप्ता सहित कई अन्य साहित्य प्रेमी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
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