कानपुर में डॉक्टर की लापरवाही पर उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: Kanpur news
कानपुर में चिकित्सा लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ एक मरीज को बिना किसी वास्तविक बीमारी के ऑपरेशन का सामना करना पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इस मामले में डॉक्टर को इलाज में खर्च हुई राशि, मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में कुल 69,300 रुपये लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मुकदमा दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह फैसला चिकित्सा क्षेत्र में जवाबदेही और मरीजों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अनवरगंज निवासी किशन कुमार कुशवाहा ने 9 जुलाई, 2015 को ईएनटी डाइग्नोस्टिक्स के डॉ. एनएस वाल्दिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। किशन कुमार के दाहिने कान में दर्द होने पर उन्होंने 30 मार्च, 2015 को डॉक्टर को दिखाया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉ. वाल्दिया ने कान में ट्यूमर होने की बात कही और ऑपरेशन की सलाह दी। 35 हजार रुपये में ऑपरेशन तय हुआ, जो 31 मार्च, 2015 को एसपीएम अस्पताल कल्याणपुर में किया गया।
ऑपरेशन के बाद भी जब किशन कुमार को कोई फायदा नहीं मिला, तो उन्होंने दोबारा डॉक्टर से संपर्क किया। इस बार उन्हें कान में कैंसर होने की जानकारी दी गई। इस पर किशन कुमार ने 27 अप्रैल, 2015 को दूसरे डॉक्टर से सलाह ली, जिन्होंने बताया कि उनके कान में न तो ट्यूमर था और न ही कैंसर। इसके बाद किशन कुमार ने जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
आयोग की नोटिस पर डॉक्टर ने जवाब दिया कि ऑपरेशन से एक दिन पहले ही मरीज को बता दिया गया था कि कान की नसें सूख चुकी हैं। हालांकि, आयोग अध्यक्ष विनोद कुमार, सदस्य नीलम यादव और वन्दना ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वादी किशन कुमार कुशवाहा के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने डॉक्टर को इलाज में खर्च हुए 62,300 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति के तौर पर 7,000 रुपये और वाद व्यय लौटाने का निर्देश दिया है। यह निर्णय मरीजों को गलत चिकित्सा प्रक्रियाओं से बचाने और उन्हें न्याय दिलाने में सहायक होगा।
