अलीगढ़ में 18 करोड़ की सरकारी जमीन हड़पने का मामला, पूर्व अधिकारियों पर FIR दर्ज | Aligarh land scam
अलीगढ़ में नगर निगम की लगभग 18 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को कथित तौर पर निजी व्यक्तियों को सौंपने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इस गंभीर प्रकरण में नगर निगम ने दो सेवानिवृत्त अधिकारियों और तीन अन्य लोगों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई है। इन पर पद का दुरुपयोग कर न्यायालय में एक समझौते के तहत बेशकीमती भूमि को वादी को सौंपने का आरोप है। यह मामला सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण है, जिससे जनता के हितों को सीधा नुकसान पहुंचा है।
यह मामला नगर निगम की भुजपुरा स्थित भूमि से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1958-59 में कूड़ा घर (ट्रेंचिंग ग्राउंड) बनाने के लिए शासन स्तर से अधिग्रहित किया गया था। यह जमीन नगर निगम के अभिलेखों में दर्ज थी। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1946-47 में ग्राम कस्बा कोल में ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए कुल 31 बीघा 13 बिस्वा भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इसमें गाटा संख्या-3315 रकबा 01 बीघा 03 बिस्वा भी शामिल था। इस गाटा संख्या के स्वामित्व को लेकर वर्ष 1991 में ओम प्रकाश शर्मा आदि बनाम नगर निगम, अलीगढ़ का मूलवाद न्यायालय सिविल जज, अलीगढ़ में दायर हुआ था।
वर्ष 2002 में, तत्कालीन नगर आयुक्त और वादी ओम प्रकाश शर्मा के बीच एक समझौता प्रस्तुत किया गया था, जिसे न्यायालय ने डिक्री कर दिया। इस समझौते के तहत गाटा संख्या-3315 की भूमि वादी के पक्ष में छोड़ दी गई, जबकि 20 फीट का मार्ग नगर निगम के लिए सुरक्षित रखा गया। आरोप है कि उस समय के अधिकारियों ने बिना उचित विधिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किए यह समझौता किया, जिससे नगर निगम को भारी आर्थिक क्षति हुई। वर्तमान में इस भूमि का अनुमानित मूल्य लगभग 18 करोड़ रुपये है।
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा के आदेश पर संपत्ति लिपिक विजय गुप्ता ने सिविल लाइन थाने में तहरीर दी है। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम की प्रत्येक सार्वजनिक संपत्ति शहर की जनता की है और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता, फर्जीवाड़ा या पद का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रकरण में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यदि किसी अधिकारी या व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाएगी। मौके पर फिलहाल भूमि पर किसी का कब्जा नहीं है, लेकिन इस Aligarh land scam की जांच से कई और परतें खुलने की उम्मीद है।
