पूर्व शिक्षा मंत्री का बयान: ‘वंदेमातरम’ का सम्मान देश के कल्याण के लिए आवश्यक
उत्तर प्रदेश के झींझक स्थित रूप रतन वाटिका गेस्ट हाउस में आयोजित एक शैक्षिक संगोष्ठी और सम्मान समारोह में पूर्व शिक्षा मंत्री एवं हिंदी साहित्य भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र शुक्ल ने देश के कल्याण के लिए ‘वंदेमातरम’ के सम्मान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बिना जनसंख्या नियंत्रण के देश का कल्याण संभव नहीं है और यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो हम सभी पुनः गुलामी की जंजीरों में जकड़ सकते हैं। यह बयान राष्ट्रीय गौरव और भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डालता है, जिसका सीधा असर आम जनता की सोच और राष्ट्रीय चेतना पर पड़ सकता है।
रवींद्र शुक्ल ने अपने संबोधन में कहा कि ‘वंदेमातरम’ का जयघोष करते हुए ही देश के वीर सपूतों ने आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने बच्चों को स्वाभिमानी बनाने और देश के प्रति सम्मान सिखाने की आवश्यकता पर बल दिया। शुक्ल ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो लोग अपने देश को भूलकर दूसरों को याद करने लगेंगे।
उन्होंने भारत के अद्वितीय इतिहास का भी उल्लेख किया, जिसे किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाया, जबकि अन्य सभी धर्मों की उत्पत्ति का पता है। इस अवसर पर डॉ. इंद्र भूषण पटेल, डॉ. विनोद दुबे, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. कुलदीप दुबे, सुमनलता सिंह, रामशंकर गुप्ता, मिथिलेश गुप्ता और रविशंकर तिवारी सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
