बागपत में DM ने लगवाई मूल प्रस्तावना, ‘Constitution Preamble controversy’ पर छिड़ी बहस
उत्तर प्रदेश के बागपत में संविधान पार्क के उद्घाटन के बाद से ही विवाद गहरा गया है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर यहां संविधान की प्रस्तावना की एक विशाल प्रतिकृति लगाई गई, लेकिन इसमें ‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ जैसे शब्द गायब हैं। ये शब्द मौजूदा संविधान का हिस्सा हैं, जिन्हें 1976 में 42वें संशोधन के जरिए जोड़ा गया था। इस चूक पर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। लोग बागपत की डीएम अस्मिता लाल पर सवाल उठा रहे हैं कि उन्होंने जानबूझकर मूल प्रस्तावना क्यों लगवाई, जबकि देश में संशोधित प्रस्तावना लागू है।
डीएम अस्मिता लाल ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि पार्क में लगाई गई प्रतिकृति संविधान के पहले ड्राफ्ट की प्रस्तावना पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मूल प्रस्तावना है और इसके शब्दों को हू-ब-हू रखा गया है। 26 जनवरी को राज्यमंत्री केपी मलिक ने इस पार्क का उद्घाटन किया था। मलिक ने इसे संविधान, नागरिक कर्तव्यों और स्वदेशी सोच का प्रतीक बताया था। पार्क में 11 फीट ऊंची और 14 फीट की प्रस्तावना की प्रतिकृति लगाई गई है, जिसका वजन लगभग 600 किलोग्राम है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में 42वें संशोधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। दक्षिणपंथी राजनीतिक दल आपातकाल के दौरान किए गए इस संशोधन का विरोध करते रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बड़े नेता दत्तात्रेय होसबले ने पिछले साल इन शब्दों को हटाने की मांग की थी। तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी इस संशोधन को ‘नासूर’ बताया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया था कि प्रस्तावना में बदलाव का उसका कोई इरादा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी नवंबर 2024 में इस संबंध में दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था।
