यूपी में स्कूल-अस्पताल खोलना होगा आसान, खत्म होगी न्यूनतम भूमि की अनिवार्यता (UP government decision)
उत्तर प्रदेश में अब स्कूल, कॉलेज और अस्पताल खोलना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। योगी सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस 2.0’ के तहत कई बड़े सुधारों का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य और रियल एस्टेट सेक्टर पर पड़ेगा। इन सुधारों के लागू होने के बाद निजी शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों के लिए न्यूनतम भूमि स्वामित्व की बाध्यता समाप्त हो जाएगी।
नए प्रस्तावों में सबसे बड़ा फोकस भूमि और निर्माण से जुड़े सुधारों पर है। अब भूस्वामियों, विशेषकर किसानों के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल किया जाएगा। खेती की जमीन को शिक्षा या उद्योग जैसे अन्य उपयोगों में लाने के लिए लंबी प्रक्रिया और दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि जब तक कोई प्रतिबंध न हो, तब तक मांग-आधारित भूमि उपयोग की अनुमति दी जाए। इससे निवेशकों का समय और लागत दोनों बचेगा।
शिक्षा क्षेत्र में निजी स्कूलों के लिए न्यूनतम भूमि स्वामित्व की बाध्यता हटने के साथ ही बुनियादी ढांचे और उपकरणों की शर्तें भी आसान होंगी। निजी विश्वविद्यालयों के लिए भी न्यूनतम भूमि आवश्यकता और एंडोमेंट फंड की शर्तों में कटौती की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं में सभी विशेष लाइसेंसों के लिए एकल नोडल एजेंसी नियुक्त होगी, जिससे डॉक्टरों के पंजीकरण और एनओसी की प्रक्रिया सरल होगी।
इन सुधारों में प्रशासनिक जटिलताओं को कम करने पर भी जोर दिया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत किया जाएगा और सभी कानूनों, नियमों के लिए एक डिजिटल रिपॉजिटरी बनाई जाएगी। भवन और निर्माण परमिट की प्रक्रिया को सरल किया जाएगा और अग्नि सुरक्षा मानकों को तर्कसंगत बनाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन सुधारों को अगले दो महीनों में लागू कर दिया जाए, जिससे प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
