UGC कानून पर वैश्य समाज में रोष, ‘काला कानून’ बताकर आंदोलन की चेतावनी
अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून को स्वर्ण समाज के लिए एक बड़ा आघात बताया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुमंत गुप्ता ने इस कानून को “काला कानून” करार देते हुए केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इसे तत्काल वापस नहीं लिया गया तो वैश्य समाज को उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
परिषद के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मुरारी प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि यह कानून हिंदू समाज के भीतर असमानता पैदा करने वाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्य एकता परिषद 1 फरवरी को प्रस्तावित बाजार बंदी का पूर्ण समर्थन करती है। प्रदेश अध्यक्ष मनीष अग्रसेना ने चिंता व्यक्त की कि यह कानून स्वर्ण समाज के बच्चों को शिक्षा से वंचित कर सकता है, जिससे समाज के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न होगा।
उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में समाज की बेटियां कॉलेज जाने से डरेंगी और झूठे आरोपों के कारण मानसिक उत्पीड़न का शिकार हो सकती हैं, जिसके गंभीर सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि इस कानून को तत्काल निरस्त कर पूर्व व्यवस्था लागू की जाए। अन्यथा, स्वर्ण समाज अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरकर अनिश्चितकालीन आंदोलन करेगा। इस अवसर पर सतीश इंजीनियर, शीतल अग्रवाल, हेमलता अग्रवाल, अजय अग्रवाल, एडवोकेट अनिल अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, मोहित अग्रवाल, शशि गोयल, नीरज अग्रवाल, बॉबी जौनई, रूपेश अग्रवाल, नीलम अग्रवाल और ब्रजेश मौजूद रहे।
यह नया कानून समाज के शैक्षणिक और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकता है, जिससे भविष्य में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
