भारत के लोकतांत्रिक मूल्य और Modi government policy: राजनाथ सिंह ने बताया कैसे हो रहा सामाजिक न्याय
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और वर्तमान सरकार की नीतियों के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति भारतीय गणतंत्र के मूल सिद्धांतों को मजबूत कर रही है। यह नीति केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं है, बल्कि प्राचीन भारत के ‘योग-क्षेम’ सिद्धांत और महात्मा गांधी के ‘सर्वोदय’ विचार की निरंतरता है, जिसका उद्देश्य सभी का उत्थान है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने ‘हम भारत के लोग’ को केंद्र में रखकर ही देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव रखी थी। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी 1952 में पहली लोकसभा को संबोधित करते हुए संसद सदस्यों को उनके लोकतांत्रिक दायित्वों की गंभीरता का स्मरण कराया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि संविधान लागू होने के बाद देश एक ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें कोई विराम नहीं होगा।
सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता
सरकार की नीतियों का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय और आर्थिक असमानताओं को कम करना है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने हाल ही में 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में पिरोया है। यह श्रमिकों के लिए बेहतर आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 और मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 जैसे कानूनों के माध्यम से सामाजिक न्याय को और मजबूती मिली है।
आर्थिक प्रगति तभी समावेशी बनती है, जब अवसरों की समानता हो। पिछले कुछ वर्षों में लिए गए कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों के चलते आज अवसरों की यह समानता हर स्तर पर बढ़ी है। ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहल इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण है, जिसके हाल ही में दस वर्ष पूरे हुए हैं। इसके तहत प्रदान किए जाने वाले नीतिगत सहयोग, आर्थिक मदद और मेंटरशिप के माध्यम से आज किसी भी व्यक्ति के लिए कोई उद्योग शुरू करना बहुत सुगम हुआ है।
गरीब कल्याण और आत्मनिर्भरता पर जोर
केंद्र सरकार ने समावेशी विकास के साथ-साथ लोगों के लिए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने पर भी निरंतर ध्यान केंद्रित किया है। ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। ‘आयुष्मान भारत योजना’ ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रदान की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जब ‘आत्मनिर्भर भारत’ का आह्वान किया था, तो वह केवल अर्थव्यवस्था के स्तर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि नागरिकों के भीतर आत्मनिर्भरता की भावना बढ़ाने का भी प्रयास था। ‘मुद्रा योजना’ और ‘स्किल इंडिया मिशन’ जैसी पहलों के माध्यम से नागरिकों को स्वावलंबी और उद्यमशील बनाने पर बल दिया गया है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान किया है। यह कदम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
