पुराने भूमि दस्तावेजों को पढ़ने में अब नहीं होगी दिक्कत, कैथी लिपि विशेषज्ञों का पैनल तैयार
बिहार की राजधानी पटना में कैथी लिपि विशेषज्ञों के लिए आयोजित पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का शनिवार को समापन हुआ। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुराने भूमि दस्तावेजों को पढ़ने में आम लोगों को आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करना है। अब इन प्रशिक्षित विशेषज्ञों के पैनल से आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रशिक्षण के दौरान कैथी लिपि की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर उसके व्यावहारिक उपयोग तक की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को विभिन्न क्षेत्रीय शैलियों के साथ-साथ भूमि से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को पढ़ने, समझने और अनुवाद करने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। विशेषज्ञों ने कैथी लिपि के सामान्य परिचय, उसकी ऐतिहासिकता, विशेषताओं और सरल स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की।
भूमि से संबंधित विभिन्न दस्तावेजों में प्रयुक्त उर्दू-फारसी शब्दावलियों की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण में मिथिला, भोजपुरी और मगध क्षेत्रों की कैथी लिपियों पर विशेष बल दिया गया और इन शैलियों में उपलब्ध भूमि से जुड़े दस्तावेजों का अभ्यास कराया गया।
कैथी लिपि में उपलब्ध पुराने दस्तावेजों के कारण राज्य के आम लोगों को लंबे समय से व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इन परेशानियों को दूर करने के उद्देश्य से ही कैथी लिपि के जानकार विशेषज्ञों का पैनल गठित कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया था। विभाग ने इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया है। अब प्रशिक्षित कैथी लिपि विशेषज्ञों के लिए प्रति पृष्ठ के हिसाब से दर भी तय कर दी गई है, जिससे आम लोगों के लिए यह सुविधा सुलभ हो जाएगी।
