सूर्यगढ़ा विधानसभा चुनाव: जातिगत समीकरण या विकास, कौन होगा मतदाताओं का मुद्दा?
लखीसराय के सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रथम चरण के तहत 6 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले सभी दलीय व निर्दलीय प्रत्याशी अपने-अपने चुनाव चिह्न के साथ गांव-गांव घूम-घूम कर मतदाताओं से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। इस बार चुनाव में जातिगत समीकरण हावी रहेंगे या विकास का मुद्दा, यह सवाल क्षेत्र के हर मतदाता के जेहन में है। लोग अपने-अपने तरीके से चुनावी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, हर मोहल्ले और गांव की गलियों में चुनावी चर्चा जोर-शोर से हो रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को दैनिक जागरण की ओर से बन्नूबगीचा गांव में एक चुनावी चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित ग्रामीणों ने विकास के मुद्दे पर अपने विचारों को साझा किया और अपनी अपेक्षाएं सामने रखीं।
चौपाल में युवा नीरज कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस बार विधानसभा चुनाव में जो भी प्रत्याशी क्षेत्र में विकास, शिक्षा और रोजगार के हित में बात करेंगे, उन्हें ही उनका वोट मिलेगा। यह बयान युवाओं की बदलती सोच को दर्शाता है, जो अब पारंपरिक जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर ठोस मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
राजो साव ने शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्र के पिछड़ेपन की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि यहां आज तक एक भी सरकारी डिग्री कॉलेज की स्थापना नहीं की जा सकी है, जो क्षेत्र के युवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि इन मुद्दों पर कभी चर्चा ही नहीं करते। साव ने जोर देकर कहा, “अब जात-पात के आधार पर मतदान नहीं करेंगे। समय बदल गया है।”
ग्रामीण डोमन यादव ने बन्नूबगीचा वीयर चौक स्थित प्रखंड सह अंचल कार्यालय भवन की बदहाली पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भवन होने के बावजूद भी यहां पदाधिकारी नहीं बैठते हैं, जिससे यहां का कार्य बुरी तरह प्रभावित होता है। उन्होंने पुरानी स्थिति को याद करते हुए बताया कि एक समय था जब यहां प्रखंड के सभी पदाधिकारी बैठकर कार्य करते थे और प्रखंड परिसर में बैंक शाखा भी थी, लेकिन अब सब कुछ यहां से हटा लिया गया है।
राजेश्वरी राम ने गांव व पंचायत में पर्याप्त जमीन होने के बाद भी उच्च स्तरीय विद्यालय भवन न बनने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यहां के युवक बाहर रहकर उच्च शिक्षा तो प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन रोजगार के अभाव में उन्हें दूसरे प्रदेशों में कमाने जाने को विवश होना पड़ता है, जो एक गंभीर समस्या है।
ग्रामीण जुलूस राम ने बेरोजगारी को सबसे बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि “बेटा पढ़-लिख लिया, लेकिन अब उसे रोजगार ही नहीं मिल रहा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद उन्हें भूल जाते हैं।
सर्जन राम सहित अन्य ग्रामीणों ने क्षेत्र में नलजल योजना की खराब स्थिति पर प्रकाश डाला। अधिक राम ने मतदाताओं से जातीय समीकरण से ऊपर उठकर मतदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार के अंत की भी मांग की, जिसे उन्होंने क्षेत्र की प्रगति में एक बड़ी बाधा बताया।
कुल मिलाकर, सूर्यगढ़ा के मतदाता इस बार विकास, शिक्षा, रोजगार और सुशासन के मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते दिख रहे हैं। जातिगत राजनीति की बजाय, वे ऐसे जनप्रतिनिधि का चुनाव करना चाहते हैं जो उनके क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सके और उन्हें एक बेहतर भविष्य प्रदान कर सके।
