बिहार चुनाव 2025: प्रत्याशी या पार्टी? मतदाताओं ने खुलकर बताया किसे देंगे वोट
बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है और इसी के साथ राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भी चुनावी चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। मतदाता यह जानने को उत्सुक हैं कि उनका बहुमूल्य वोट किस उम्मीदवार को मिलेगा या फिर किसी खास पार्टी के चुनाव चिह्न को। यह सवाल हर चौक-चौराहे और चाय की दुकानों पर बहस का मुद्दा बना हुआ है।
जागरण की टीम ने मधेपुरा जिले की बिहारीगंज विधानसभा सीट के मतदाताओं के मन को टटोलने का प्रयास किया। रिमझिम बारिश के बावजूद, करीब 10 किलोमीटर के दायरे में यह पता लगा पाना मुश्किल हो रहा था कि मतदाताओं की हवा किस ओर बह रही है। मीरगंज चौक पर चाय की दुकान पर मौजूद लोगों से बातचीत के दौरान मतदाताओं ने खुलकर अपनी राय रखी। किस पार्टी को समर्थन देंगे, यह पूछने पर थोड़ी हिचकिचाहट दिखी, लेकिन अधिकांश ने साफ किया कि “जो अच्छा काम किया और कर रहा है, उसी को वोट देंगे।” दिलचस्प बात यह रही कि कई मतदाताओं ने कहा, “उम्मीदवार को छोड़िए, पार्टी के चुनाव चिह्न पर वोट करेंगे।”
जोरगामा निवासी मु. रब्बान और मु. कासिम ने वर्तमान विधायक के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि “इस बार बदलाव जरूरी है। जीतने के बाद विधायक जी क्षेत्र में आते भी नहीं हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “जो सरकार रोजगार की बात करेगा, उसी दल के नेता को समर्थन किया जाएगा।” इन मतदाताओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को भी अपनी प्रमुख समस्या बताया।
इसके विपरीत, मीरगंज निवासी अमरेश कुमार और प्रमोद वर्मा ने क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की सराहना की। उनका कहना था कि “क्षेत्र में काम तो बहुत हुआ है, कुछ काम बच गया है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी सुधार आया है।” वहीं उपस्थित पिंटू कुमार ने भी पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि “प्रत्याशी नहीं, पार्टी को वोट करेंगे। पार्टी जिसे उम्मीदवार बनाएगी, हमारा समर्थन उसे ही रहेगा।” उन्होंने बिहार एवं केंद्र सरकार की योजनाओं से लोगों को मिल रहे लाभ का जिक्र करते हुए एनडीए गठबंधन को समर्थन देने की बात कही।
कुछ आगे बढ़ने पर पान की दुकान पर खड़े मु. अंजुम ने अपनी अपेक्षाएं साझा करते हुए कहा कि “हमें ऐसे जनप्रतिनिधि को चुनना है जो बेहतर तरीके से तथा स्थानीय समस्याओं के साथ-साथ बेरोजगारी दूर करने की दिशा में भी प्रयास करे।” स्पष्ट है कि बिहार के मतदाता अब केवल वादों पर नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और विकास कार्यों पर वोट करने का मन बना चुके हैं। युवाओं की भूमिका भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण रहने वाली है। चुनाव आयोग भी शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर रहा है।
