संसद में 100 दिन का सत्र हो: मायावती की मांग, पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में उठी चिंता
लखनऊ में चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मांग की है कि संसद और राज्य विधानमंडलों के सत्रों का समय बढ़ाया जाए और इन्हें साल में कम से कम 100 दिन नियमित व शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाए। मायावती के अनुसार, सत्रों के घटते समय और हंगामे के कारण इन महत्वपूर्ण संस्थाओं की जन उपयोगिता कम हो रही है।
मायावती ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारतीय संसद और राज्य विधानमंडल संवैधानिक व लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं। ये सरकार और कार्यपालिका को देश व जनहित के प्रति जवाबदेह बनाए रखने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन संस्थाओं की कार्यवाही साल में कम से कम 100 दिन के कैलेंडर के अनुसार, उचित नियमों और शांति व्यवस्था के साथ चलनी चाहिए।
इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय ने भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि सदन का समय कम होने से महत्वपूर्ण मुद्दों पर उचित बहस नहीं हो पाती। पांडेय के अनुसार, जब पीठासीन अधिकारी सत्ता और विपक्ष दोनों को समान दृष्टि से देखते हैं, नियमों के संरक्षक बनते हैं और सदन को बहस का मंच बनाए रखते हैं, तभी संसद और विधानसभाएं वास्तव में लोकतंत्र के मंदिर बन पाती हैं। यह सार्वजनिक हित का विषय है क्योंकि विधायी निकायों की प्रभावशीलता सीधे तौर पर जनहित से जुड़े कानूनों और नीतियों को प्रभावित करती है।
