गोरखपुर में बढ़ रहा Juvenile crime, क्रिमिनल गैंग बच्चों का कर रहे इस्तेमाल
गोरखपुर जिले में अपराध का पैटर्न बदल रहा है। पुलिस के लिए अब पेशेवर अपराधियों के साथ-साथ ‘नौसिखिए’ और नाबालिग अपराधी भी बड़ी चुनौती बन गए हैं। हाल ही में हुई कई वारदातों में यह सामने आया है कि कम उम्र के बच्चे लालच या गलत संगत में आकर पेशेवर अपराधियों के लिए संगीन वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। हत्या, लूट, चोरी और छिनैती जैसी गंभीर घटनाओं में नाबालिगों की संलिप्तता ने कानून-व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
नाबालिगों को क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं क्रिमिनल गैंग?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पेशेवर अपराधियों पर निगरानी रखना और उनके रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई करना आसान होता है। लेकिन नाबालिग अपराधियों की पहचान और रोकथाम कहीं अधिक कठिन है। क्रिमिनल गैंग इस बात का फायदा उठाते हैं कि नाबालिगों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं होता। उन्हें आसानी से पैसे कमाने का लालच दिया जाता है, या फिर नशे की लत का शिकार बनाकर अपराध की ओर धकेला जाता है।
एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि किशोर न्याय बोर्ड के तहत नाबालिगों को नरम दंड मिलता है। अपराधी गिरोह जानते हैं कि नाबालिगों को जेल भेजने की बजाय सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है, इसलिए वे उन्हें आगे कर देते हैं। इससे पुलिस के लिए ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई करना जटिल हो जाता है।
पुलिस की नई रणनीति और सामाजिक चुनौती
इस चुनौती से निपटने के लिए गोरखपुर पुलिस प्रशासन ने स्कूलों में जागरूकता अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। संवेदनशील इलाकों में बीट पुलिसिंग बढ़ाई जा रही है। साथ ही सामाजिक संगठनों के सहयोग से नाबालिगों को अपराध से दूर रखने के लिए काउंसलिंग कार्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं।
समाजशास्त्रियों का मानना है कि परिवारों की कमजोर निगरानी, स्कूलों से दूरी, बेरोजगारी और मोबाइल-इंटरनेट का दुरुपयोग बच्चों को अपराध की ओर धकेल रहा है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और उनके दोस्तों के बारे में भी जानकारी रखें।
