गोरखपुर में क्राइम का नया ट्रेंड, नाबालिगों को मोहरा बना रहे क्रिमिनल गैंग
गोरखपुर जिले में अपराध के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पेशेवर अपराधी अब खुद वारदातों को अंजाम देने के बजाय नाबालिगों को मोहरा बना रहे हैं। हत्या, लूट और चोरी जैसी गंभीर वारदातों में कम उम्र के बच्चों की संलिप्तता सामने आने से पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। हाल के महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें लालच या गलत संगत में आकर नाबालिग बच्चे पेशेवर अपराधियों के लिए काम कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, अपराधी गिरोहों ने नाबालिगों का इस्तेमाल करने का नया तरीका ढूंढ लिया है। इसका मुख्य कारण यह है कि नाबालिगों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं होता, जिससे पुलिस के लिए उन पर निगरानी रखना मुश्किल होता है। इसके अलावा, अपराधी गिरोह जानते हैं कि किशोर न्याय बोर्ड के तहत नाबालिगों को नरम दंड मिलता है, जिससे वे आसानी से बच निकलते हैं।
गोरखपुर में लूट और चोरी की कई घटनाओं में नाबालिगों की भूमिका सामने आई है। कई मामलों में बाइक सवार लुटेरों के साथ पकड़े गए आरोपी नाबालिग निकले। पूछताछ में पता चला कि उन्हें आसानी से पैसे कमाने का लालच दिया गया था। कुछ मामलों में मोबाइल और नशे की लत भी अपराध का कारण बनी। दो साल पहले रामगढ़ताल इलाके में एक ग्राम प्रधान की हत्या की जांच में भी नाबालिगों की संलिप्तता सामने आई थी, जहां उनका इस्तेमाल रेकी और वारदात को अंजाम देने में किया गया था।
इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन ने स्कूलों में जागरूकता अभियान, बीट पुलिसिंग और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई है। साथ ही सामाजिक संगठनों के सहयोग से काउंसिलिंग जैसे कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। समाजशास्त्रियों का मानना है कि परिवारों की कमजोर निगरानी, स्कूलों से दूरी, बेकारी और मोबाइल-इंटरनेट का दुरुपयोग बच्चों को अपराध की ओर धकेल रहा है। अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
