उसर भूमि में गेहूं और सरसों की नई किस्में, किसानों की आय में होगी वृद्धि
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए), कानपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए तीन नई फसल प्रजातियां विकसित की हैं, जो उनकी आय बढ़ाने और फसल नुकसान को कम करने में सहायक होंगी। राज्य बीज विमोचन समिति ने इन प्रजातियों को मंजूरी दे दी है।
गेहूं की दो नई किस्में, के-1905 और के-1910, विशेष रूप से उसर भूमि के लिए तैयार की गई हैं। ये किस्में न केवल बेहतर पैदावार देती हैं, बल्कि भूरा, पीला व काला रस्ट जैसे रोगों के प्रति भी प्रतिरोधी हैं। इन पर कीटों का प्रभाव भी कम पड़ता है। 125 से 130 दिनों में पकने वाली ये किस्में प्रति हेक्टेयर 35 से 40 कुंतल तक उपज दे सकती हैं।
सरसों की नई प्रजाति ‘आजाद गौरव’ को विलंबित बुवाई के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में संस्तुत किया गया है। यह किस्म तापमान के उतार-चढ़ाव का सामना करने में सक्षम है और 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है। ‘आजाद गौरव’ प्रति हेक्टेयर औसतन 18 से 19 कुंतल पैदावार देती है। यह रोग प्रतिरोधी है और इसमें कीटों का प्रभाव भी कम होता है। इस किस्म के दाने बड़े होते हैं और तेल की मात्रा 39.6% तक पाई गई है। इन नई किस्मों के विकास से कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार की उम्मीद है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ होगा।
