AI युग में UPSC exam की तैयारी क्यों है ‘समय की बर्बादी’? संजीव सान्याल ने उठाए सवाल
जाने-माने अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने UPSC परीक्षा की तैयारी को लेकर एक राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि AI के तेजी से बदलते दौर में नौकरी की सुरक्षा के लिए UPSC के पीछे भागना ‘समय की बर्बादी’ है। उनका कहना है कि भारत की शिक्षा प्रणाली और करियर की आकांक्षाएं AI-आधारित भविष्य की वास्तविकताओं से मेल नहीं खाती हैं।
सान्याल ने लाखों उम्मीदवारों द्वारा हर साल UPSC की तैयारी में लगने वाले समय और ऊर्जा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 99% से अधिक की विफलता दर के साथ, यह एक बड़ा जोखिम है। उन्होंने उन ‘पेशेवर UPSC उम्मीदवारों’ की आलोचना की जो बार-बार प्रयास करते हैं और अपने उत्पादक वर्षों को बर्बाद कर देते हैं। सान्याल ने कहा कि अगर इतना बड़ा जोखिम लेना ही है, तो नौकरशाह क्यों बनना है?
उन्होंने पारंपरिक विश्वविद्यालय मॉडल को भी निशाने पर लिया। सान्याल के अनुसार, व्याख्यान-आधारित कक्षाएं और कठोर शैक्षणिक संरचनाएं आधुनिक कार्यबल की जरूरतों से अलग हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि AI, ज्ञान प्रदान करने में विश्वविद्यालयों से कहीं अधिक प्रभावी होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि समस्या शिक्षा नहीं है, बल्कि यह है कि सीखने और कौशल विकास को कैसे व्यवस्थित किया जाता है।
सान्याल ने शिक्षा प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव की वकालत की। उन्होंने कहा कि छात्रों को जल्द काम शुरू करना चाहिए और लचीले ऑनलाइन सीखने के साथ काम को जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पारंपरिक लंबे शैक्षणिक चक्रों में फंसे रहने से बेहतर है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से उच्च शिक्षा केवल एक छोटे से अभिजात वर्ग के लिए सुलभ थी, और आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग विश्वविद्यालय जाए बिना उत्पादक जीवन जीता है।
सान्याल के इन बयानों ने एक बड़ी बहस को फिर से शुरू कर दिया है: क्या भारत की शिक्षा प्रणाली अपने युवाओं को तेजी से विकसित हो रही दुनिया के लिए तैयार कर रही है, या उन्हें एक ऐसे युग के सपनों में फंसा रही है जो अब स्थिर और अनुमानित नहीं रहा?
