हाथरस में कैदी फरार होने के मामले में दो सिपाही बरी, Aligarh court ने दिया संदेह का लाभ
अलीगढ़ सीजेएम न्यायालय ने हाथरस के दो सिपाहियों को 2019 के एक मामले में बरी कर दिया है। इन सिपाहियों पर पेशी के बाद कैदियों को वापस ले जाते समय लापरवाही बरतने और उन्हें फरार होने देने का आरोप था। न्यायालय ने यह फैसला अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों को पेश न कर पाने के कारण सुनाया। इस मामले में पुलिस की ओर से ही शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन ट्रायल के दौरान पुलिस ही अपने गवाहों को पेश नहीं कर पाई।
यह घटना 23 नवंबर 2019 की है। हाथरस पुलिस लाइन के दो सिपाही अफरोज खां और फिरोज खां दो अपराधियों को हाथरस किशोर न्याय बोर्ड में पेशी के लिए लाए थे। पेशी के बाद दोनों सिपाहियों को अपराधियों को वापस जेल ले जाना था। आरोप है कि रास्ते में सिपाहियों की लापरवाही के कारण दोनों अपराधी मौके से फरार हो गए। इस घटना के बाद दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया था और उनके खिलाफ सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
इस मामले का ट्रायल 2021 में सीजेएम न्यायालय में शुरू हुआ। आरोपित सिपाही अफरोज और फिरोज तो अदालत में हाजिर हुए, लेकिन अभियोजन पक्ष की ओर से कोई भी गवाह पेश नहीं किया गया। न्यायालय ने कई बार गवाहों को पेश करने के लिए समन और वारंट जारी किए, लेकिन पुलिस स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
न्यायालय ने इस आधार पर अभियोजन का साक्ष्य पेश करने का अवसर समाप्त कर दिया। अदालत ने कहा कि जब वादी पक्ष ही साक्ष्य पेश नहीं कर सका, तो संदेह का लाभ देते हुए दोनों सिपाहै दोनों सिपाहियों को बरी किया जाता है।
