2014 के बाद Congress leaders का पार्टी छोड़ना क्यों नहीं रुका? मोकिम की बर्खास्तगी ने फिर उठाए सवाल
ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम को कांग्रेस पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। मोकिम पर आरोप है कि उन्होंने सोनिया गांधी को लिखे एक पत्र को सार्वजनिक किया, जिसमें उन्होंने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए मोकिम को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि, यह घटना कांग्रेस के लिए कोई नई नहीं है।
साल 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से कांग्रेस पार्टी को लगातार बड़े सियासी झटके लगे हैं। कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। इन नेताओं के जाने से पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कांग्रेस में असहमति को दबाने का इतिहास पुराना रहा है, जिसका उदाहरण 2020 में G-23 नेताओं द्वारा सामूहिक और पारदर्शी नेतृत्व की मांग करने वाले पत्र के बाद भी देखने को मिला। उस समय भी कई नेताओं को निष्कासित किया गया या उन्होंने निराश होकर खुद ही पार्टी छोड़ दी।
इन नेताओं के पार्टी छोड़ने का सीधा असर कांग्रेस की राजनीतिक ताकत पर पड़ा है। नॉर्थ ईस्ट, उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में पार्टी लगातार कमजोर होती गई है। इन राज्यों में पार्टी की पकड़ ढीली होने के कारण कांग्रेस धीरे-धीरे गठबंधनों पर निर्भर होती चली गई है।
