बिहार में सरकारी जमीन पर कब्जा: ‘सरकार’ की लापरवाही से हो रही अवैध बिक्री, अब प्रशासन जागा
कांटी में कृषि विभाग की अवैध तरीके से बिक्री और दाखिल खारिज किए जाने के बाद जिला से लेकर मुख्यालय तक किरकिरी हुई थी। इस खेल में कांटी सीओ और अंचल कार्यालय भी संलिप्त था, जिसके बाद विभाग ने सीओ को निलंबित कर दिया था। इस घटना के बाद जिले में सरकारी भूमि को चिह्नित कर मापी, सीमांकन, जमाबंदी और दाखिल खारिज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, ताकि दोबारा उस प्रकार का मामला नहीं हो सके।
इसके तहत मोतीपुर और पारू में राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र, मुशहरी में पशुपालन विभाग और मुशहरी में मणिकामन झील के समीप स्थित सरकारी भूमि को चिह्नित किया गया है। इन जगहों पर अतिक्रमण की भी समस्या है और अब तक इनकी जमाबंदी और दाखिल खारिज नहीं कराया गया है। मापी और सीमांकन होने से भूमि का क्षेत्र स्पष्ट हो जाएगा। तिरहुत प्रमंडल के संयुक्त निदेशक ने मोतीपुर और पारू सीओ को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए अविलंब ऑनलाइन जमाबंदी करने को कहा है।
बताया गया कि पारू के देवरिया और मोतीपुर के जसौली में कृषि बीज गुणन प्रक्षेत्र की भूमि है। यह कृषि विभाग के अंतर्गत है, लेकिन उक्त भूमि का ऑनलाइन जमाबंदी अब तक दर्ज नहीं हुआ है। उच्चाधिकारियों के द्वारा भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में शीघ्र जमाबंदी कायम करने को कहा गया था। इसलिए इसे प्राथमिकता के आधार पर लेकर जमाबंदी दर्ज करने को कहा है।
पशुपालन विभाग के क्षेत्रीय निदेशक ने मुशहरी सीओ को पशुपालन विभाग की जमीन का खाता संख्या और दाखिल खारिज से संबंधित रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही इसका ऑनलाइन जमाबंदी भी करने को कहा है। बताया गया कि भगवानपुर में पशुपालन विभाग का कार्यालय है, लेकिन इसका खाता संख्या नहीं मिल रहा है। इसे उपलब्ध कराने को कहा है। मुशहरी अंचल स्थित मणिकामन झील के समीप पर्यटन विभाग द्वारा उपलब्ध सरकारी जमीन पर विकास कार्य किया जा रहा है, लेकिन आवंटित भूमि के कुछ भाग में स्थानीय लोगों के द्वारा कार्य करने में बाधा उत्पन्न की जा रही है।
