CJI सूर्यकांत: न्यायपालिका लोकतंत्र की रीढ़, जिला अदालतों की चुनौतियों पर कही ये बड़ी बात
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है और इसकी स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाला कोई भी हस्तक्षेप संविधान की आत्मा पर चोट माना जाएगा। सीजेआइ शनिवार को ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में न्यायपालिका की स्वतंत्रता विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
सीजेआइ सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका के सामने असली चुनौती जिला अदालतों के स्तर पर है, जो न्याय चाहने वाले अधिकांश नागरिकों के लिए संपर्क का पहला पड़ाव हैं। उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत वादी जिला स्तर पर ही अपना भाग्य तय किए जाने की उम्मीद करते हैं। किसी भी व्यवस्था की पहली चिंता यह होती है कि जिला अदालत वादियों को न्याय दिलाने में सक्षम हो।
सीजेआइ ने संविधान को चारपाई से तुलना करते हुए कहा कि इसकी मजबूती- कठोरता और लचीलेपन के संतुलन में है। रस्सियां ज्यादा कसीं तो टूट जाएंगी, ढीली छोड़ीं तो ढह जाएगी। यही संतुलन भारत को युवा गणराज्य होते हुए भी परिपक्व लोकतंत्र बनाता है। उन्होंने कहा कि संविधान की मूल संरचना फ्रीडम, लोकतंत्र, सेकुलरिज्म, न्याय न तो कमजोर की जा सकती है और न बदली जा सकती है। ज्यूडिशियल रिव्यू न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत है और यह कायम रहेगी।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्व के सबसे बड़ा मूट कोर्ट ‘न्यायाभ्यास मंडपम्’ राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह विद्यार्थियों को वास्तविक न्यायालय जैसे माहौल में वाद-विवाद, वकालत, मध्यस्थता और विवाद समाधान का अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण प्रदान करेगा। सीजेआई ने न्यायाधीशों के काम के तनावपूर्ण घंटों को देखते हुए उन्हें खुद को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए मनोरंजक गतिविधियों में भाग लेने की भी सलाह दी।
