मुजफ्फरपुर: स्नातक रिजल्ट में गड़बड़ी से छात्र परेशान, दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर
मुजफ्फरपुर में स्नातक तृतीय वर्ष के परीक्षा परिणाम में आई गड़बड़ी ने छात्रों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र अपने रिजल्ट में सुधार की मांग को लेकर कॉलेज से लेकर बीआरए बिहार विश्वविद्यालय तक चक्कर लगाते रहे, लेकिन उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह निर्णय लिया है कि अब छात्र अपने आवेदन सीधे कालेजों में जमा करेंगे।
विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग के अनुसार, स्नातक पार्ट थर्ड का रिजल्ट पेंडिंग होने या उसमें किसी भी प्रकार की अन्य गड़बड़ी होने पर छात्र अपने संबंधित कॉलेज में आवेदन जमा कर सकेंगे। कॉलेज इन सभी आवेदनों और आवश्यक दस्तावेजों को परीक्षा विभाग को प्रेषित करेंगे। परीक्षा विभाग का कहना है कि इन आवेदनों के आधार पर 15 दिनों के भीतर रिजल्ट में सुधार कर उसे जारी कर दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि वे विद्यार्थियों के आवेदन एक साथ परीक्षा विभाग को भेजें। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय ने स्नातक सत्र 2022-25 के तृतीय वर्ष का रिजल्ट हाल ही में जारी किया था। सूत्रों के अनुसार, इस बार तीन हजार से अधिक विद्यार्थियों का रिजल्ट या तो पेंडिंग है या फिर उसमें कोई न कोई गड़बड़ी पाई गई है। इसी कारण सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र अपनी मार्कशीट संबंधी समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे थे।
विश्वविद्यालय की ओर से छात्रों को आश्वासन दिया गया है कि उनके रिजल्ट में जल्द ही सुधार किया जाएगा। परीक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को एक पत्र भी भेजा है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. राम कुमार ने बताया कि प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों के आवेदन अपने स्तर पर ही जमा करें और फिर उसे परीक्षा विभाग को भेजें। उन्होंने कहा कि रिजल्ट में सुधार का कार्य तेजी से किया जाएगा और छात्रों को अनावश्यक परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, कुछ छात्र ऐसे भी हैं जिनकी समस्याएं पांच साल पुरानी हैं। एक छात्र ने बताया कि स्नातक सत्र 2016-19 का होने के बावजूद उसकी मार्कशीट पर अब तक पार्ट वन के अंक नहीं चढ़े हैं, जिसके कारण उसका रिजल्ट पेंडिंग है। शिकायत के पांच साल बाद अब इस मामले में सुधार की कवायद शुरू हुई है। यह स्थिति छात्रों में विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति असंतोष पैदा कर रही है।
