मुजफ्फरपुर में अतिक्रमण: प्रशासन की मेहनत पर फिर रहा पानी, समस्या जस की तस
मुजफ्फरपुर शहर में अतिक्रमण की समस्या लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही है, जहाँ प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अभियान अपनी प्रभावशीलता खोते नजर आ रहे हैं। जिला, पुलिस और नगर निगम के संयुक्त प्रयासों के बावजूद, सड़कों और फुटपाथों पर अवैध कब्जे हटाने के कुछ ही घंटों या दिनों बाद फिर से हो जाते हैं। यह स्थिति आम जनता के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है और प्रशासनिक मेहनत पर पानी फेर रही है।
सूत्रों के अनुसार, बीते एक सप्ताह से चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियानों का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। जहाँ भी एसडीओ पूर्वी के नेतृत्व में अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया गया, वहां जल्द ही अवैध दुकानें फिर से सज गईं। हालात फिर से पहले जैसे हो गए हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या प्रशासन की कोशिशें केवल दिखावा मात्र हैं?
अतिक्रमण हटाए गए स्थानों पर दोबारा कब्जा न हो, इसकी जिम्मेदारी संबंधित इलाके के थाना पुलिस की है। हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस अपनी इस जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक से नहीं कर रही है। इसी निष्क्रियता के कारण प्रशासनिक मेहनत का परिणाम शून्य होता दिख रहा है।
उदाहरण के तौर पर, अघोरिया बाजार चौक को जाम से मुक्त कराने के लिए पिछले सप्ताह प्रशासन की टीम ने पचास से अधिक अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया था। दुकानदारों को दोबारा अतिक्रमण करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। लेकिन, अभियान के दूसरे ही दिन वहां फिर से अवैध कब्जा हो गया। जिन लोगों को सड़क पर बनाए गए अवैध निर्माण हटाने के लिए कहा गया था, उन्होंने प्रशासन के आदेशों को अनसुना कर दिया।
इसी तरह, दो दिन पूर्व मोतीझील में भी अभियान चलाकर स्थायी दुकानदारों द्वारा सड़क पर बनाई गई सीढ़ियों को तोड़ा गया था। परंतु, अभियान दल के जाने के दूसरे ही दिन दुकानदारों ने लकड़ी और लोहे की अस्थायी सीढ़ियां लगा लीं। अभियान दल को देखते ही वे इन्हें हटा लेते हैं और उनके जाते ही पुनः स्थापित कर लेते हैं। कल्याणी के पास तो स्थायी दुकानों के सामने ही दो दर्जन से अधिक दुकानदारों ने सड़क पर सामान सजा लिया है।
मोतीझील पुल के नीचे बने वाहन पार्किंग स्थल को भी अवैध कब्जे से खाली कराया गया था, लेकिन अगले ही दिन वहां फिर से फुटपाथी दुकानदारों ने कब्जा जमा लिया। इस प्रकार, कुल मिलाकर अतिक्रमण अभियान का लाभ शहरवासियों को नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि इसका असर घंटे-दो घंटे से अधिक नहीं टिकता।
नगर आयुक्त और सिटी एसपी ने स्वयं सड़क पर उतरकर स्टेशन रोड को अतिक्रमण से मुक्त कराया था। लेकिन, आज भी निगम कार्यालय के प्रवेश द्वार के दोनों ओर अवैध दुकानें संचालित हो रही हैं। सड़क पर बेंच-कुर्सी लगाकर होटल चलाना आम बात हो गई है। यह स्थिति शहर के सुचारू यातायात और नागरिकों की सुविधा के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
