मुजफ्फरपुर में एड्स का बढ़ता खतरा: किशोरों में संक्रमण की चिंता
मुजफ्फरपुर में एचआईवी संक्रमण का दायरा अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में चिंता की लहर दौड़ गई है। जो क्षेत्र कभी एचआईवी के हाई रिस्क जोन माने जाते थे, जैसे ढाबा, रेड लाइट एरिया और प्रवासी मजदूरों के इलाके, अब वहां के साथ-साथ कोचिंग संस्थानों में जाने वाले किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यह एक गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि एचआईवी के प्रसार को रोकने के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियान और बचाव के तरीकों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर पर किशोर मरीजों की बढ़ती संख्या विभाग के लिए सिरदर्द बन गई है। वर्तमान में, जिले में पांच हजार से अधिक मरीज एआरटी सेंटर से जुड़े हुए हैं और नियमित रूप से दवा ले रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें 400 से अधिक मरीज 15 साल से कम उम्र के हैं। पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, हर साल औसतन चार से पांच सौ नए मरीज सामने आ रहे हैं। वर्ष 2023 में ही 455 नए एचआईवी पॉजिटिव मरीज मिले हैं।
एचआईवी एड्स के मरीजों के इलाज के लिए एसकेएमसीएच परिसर में स्थित एआरटी सेंटर वर्ष 2006 से कार्यरत है। तब से अब तक कुल 17,110 मरीजों का निबंधन किया गया है, जिनमें से 5,331 मरीज जिले के हैं और उन्हें नियमित दवाइयां दी जा रही हैं। पहले यह व्यवस्था थी कि पूरे बिहार के मरीज इलाज के लिए यहां आते थे, लेकिन पिछले पांच वर्षों में हुए बदलावों के बाद, हर जिले और सदर अस्पताल में जांच, इलाज और दवा वितरण की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। इसके बावजूद, जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. सीके दास के अनुसार, जिले के बाहर के मरीज भी यहां इलाज कराने आते रहते हैं, जिन्हें संबंधित जिले के सेंटर से जोड़ दिया जाता है। प्रवासी मजदूरों को भी उनके गंतव्य राज्यों के एआरटी सेंटरों से जोड़ा जाता है, जिसके लिए उन्हें तीन महीने की दवा दी जाती है।
जानकारों का मानना है कि एचआईवी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता ही है, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिले के साहेबगंज, मीनापुर, औराई, गायघाट और मोतीपुर जैसे इलाकों को हाई रिस्क जोन में गिना जाता है, जहाँ हर साल नए मरीज मिल रहे हैं। किशोरों के बीच संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए, स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों की तत्काल आवश्यकता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है।
